अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 150, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्राप्त सामानों में एक चिट्ठी भी थी और एक फोटो, जो अशफाक
उल्ला खां का था, प्राप्त हुआ था।¹
गिरफ्तारी का तार मिलते अशफाक के भाई रियासत उल्ला खाँ
दिल्ली के लिए रवाना हो गये। वे सैयद हबीब से मिले और फिर बैरिस्टर
नूर मुहम्मद के पास गये। जेलर के पास सूचना भिजवाई गई कि
अशफाक के भाई आये हैं और मिलना चाहते हैं। निर्धारित समय पर
रियासत उल्ला खां अशफाक से मिले। अशफाक बड़े प्रसन्न लग रहे थे।
विदा होते समय अशफाक ने अपने भाई से कहा कि - 'वालिदा साहिब
को सलाम अर्ज कीजिएगा और यह अर्ज कीजिएगा कि आप कतई परेशान
न हों, जो हुक्म खुदा देगा, वह होकर रहेगा।' रियासत उल्ला वापस
शाहजहाँपुर आ गये। सुबह सैयद फरजन्द अली, जो गुप्तचार विभाग का
व्यक्ति था, उनके पास आया और कहा कि - आपको मिस्टर ऐनुद्दीन
स्पेशल मजिस्ट्रेट और खान बहादुर तसद्दुक हुसैन डिप्टी सुपरिन्टेन्डेन्ट ने
लखनऊ बुलाया है। रियासत उल्ला खां लखनऊ गये। अशफाक को जुर्म
कबूल करने का जोर देने की बात करने लगे। रियासत उल्ला उन दोनों
अधिकारियों के साथ दिल्ली आये।² लेकिन अशफाक ने एक बात नहीं
मानी। वे किसी और का नाम लेकर फंसाना नहीं चाहते थे। वे कहते रहे
कि यदि मुझे फांसी देने में सी०आई०डी० को खुशी है, तो अच्छा ही है,
मैंने तो आजादिये हिन्द का बीड़ा उठाया था।³ पुलिस अशफाक को लेकर
लखनऊ आयी। पुलिस किसी भी प्रकार अशफाक को अपने पक्ष में कर
लेना चाहती थी।
- सी०आई०डी०, बायल्यू-2, काकोरी षड़यंत्र केस-उ०प्र०रा०अभि०, पृष्ठ-41
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -97-98
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -99
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