अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअशफाक दो महीने अपने भाई शहनशाह खां के पास रहे, लेकिन
उनका मन नहीं लगा। शहनशाह खाँ ने समझाया कि ऐसी परिस्थितियों
में इधर-उधर भटकना उचित नहीं है, परन्तु अशफाक नहीं माने। वे एक
स्थान पर रुकना नहीं चाहते थे, वे मुल्क की खिदमत करना चाहते थे।
भोपाल के बाद अशफाक दिल्ली जा पहुंचे। वहां वे बचपन के साथी और
साथ-साथ पढ़े दोस्त सैयद हबीब अहमद के मकान पर रहने लगे। सैयद
हबीब भी शाहजहांपुर का ही रहने वाला था। सैयद हबीब का एक और
घर भी था, जहाँ वह रहता था।¹
अशफाक की फरारी का जीवन समाप्त हो गया। आखिर वे पकड़े
गये। अशफाक उल्ला को दिल्ली सी०आई०डी० के खान बहादुर हाकिम
इकरामुल हक डिप्टी सुपरिन्टेन्डेण्ट ने 9: 30 बजे 8 सितम्बर, 1926 को
अरेस्ट किया² और इधर रियासत उल्ला खाँ को दिल्ली के नूर मुहम्मद
बैरिस्टर का एक तार मिला। यह तार उनके बड़े भाई शफी उल्ला के नाम
था। उसमें लिखा था - 'आपके भाई अशफाक उल्ला बन्दी बना लिए गये
हैं, शीघ्र आओ।' अशफाक को गिरफ्तार कराने में उनके ही मित्र सैयद
हबीब अहमद का हाथ था।³ डिप्टी इंस्पेक्टर ने उसी दिन सूचना प्राप्त की
कि अशफाक एक घर में रह रहा है। एक इंस्पेक्टर, चार कांस्टेबल वहां के
लिए रवाना कर दिये गये। घर में प्रवेश करने से पहले दो गवाह पाये
गये। उन्होंने पाया कि अशफाक उल्ला एक चारपाई पर बैठे हुए थे। डिप्टी
सुपरिन्टेन्डेन्ट ने कमरे से प्राप्त सामानों की सूची तैयार की। एक बाक्स
भी था, जो कागजों से भरा था। बक्से को सील कर दिया गया। अगले
दिन प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट सैयद गुलाम मुस्तफा शाह के समक्ष पेश किया
गया।
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -95
2 सी०आई०डी० वायल्यूम-2, काकोरी षणयन्त्र केस,उ०प्र०रा० अभि०, पृष्ठ-41 - अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ - 95
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