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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 146, कुल 297 में से

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पृष्ठ 146

इन्द्रभूषण मित्र जो अशफाक का मित्र ही था, पुलिस का मुखबिर
बन गया था। लेकिन इन्द्रभूषण द्वारा पुलिस की चाल को अशफाक के
भाई रियासत उल्ला खाँ ने नाकाम कर दिया। इस घटना से और
असफलता के कारण हार्टन रियासत उल्ला पर नाराज भी हो गये और
मुकदमा चलाने की धमकी भी दी, परन्तु खान बहादुर तसद्दुक हुसैन
डिप्टी सुपरिण्टेण्डेंट पुलिस ने अपना दोस्त बताकर माफी दिला दी लेकिन
पुलिस रियासत पर दबाव डालती रही कि अशफाक को सरकारी गवाह
बना दिया जाय। पुलिस तुली हुई थी कि अशफाक अपना मार्ग छोड़कर
सरकारी गवाह बन जाये। पुलिस ने इस हेतु अशफाक के घर के लोगों
को तंग भी किया। गुप्तचर विभाग के लोग कई प्रकार से भेष बदलकर,
जिनमें प्रायः महिलाएं होती थी, घर जाते थे, लेकिन अशफाक तो फरार
थे। बाद में पुलिस को विश्वास हो गया कि अशफाक उल्ला. वास्तव में
फरार है। पुलिस किसी भी कीमत पर अशफाक को गिरफ्तार करना
चाहती थी। उन्हें घर में न पाकर पुलिस ने उनके भाई की बन्दूक जब्त
कर ली थी।¹
अशफाक का फरार होना-
अशफाक उल्ला खाँ को अब घर में रखना उचित नहीं था। वे घर
से बाहर आधा मील दूर एक गन्ने के खेत में छिपे रहते थे। घरवालों से
सम्पर्क बना हुआ था, उनका खाना वहीं पहुंचा दिया जाता था। यही
नहीं अशफाक को पुलिस की गतिविधियों की जानकारी भी मिलती थी।
अशफाक चार दिनों तक गन्ने के खेत में छिपे रहे।
पुलिस के गुप्तचर विभाग का जब आना-जाना कम हुआ तो
घरवालों ने उन्हें कुछ रूपये देकर नेपाल भेज दिया। वहां तक पहुंचाने चार
सशस्त्र व्यक्ति भी साथ गये।

  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -84
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