अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवह उन्हें डालने के लिए डाकखाने भी गये थे, परन्तु डाक निकल जाने
के कारण वह लेटर बाक्स में न डाल सके। इसलिए वापस ले आये थे।
उनकी यही असावधानी उनके लिए दुर्भाग्यपूर्ण सिद्ध हुई। इसमें एक पत्र
दल की गतिविधियों के विषय में था, जिसे पुलिस ने अपने अधिकार में
ले लिया।
अशफाक उल्ला खाँ शाहजहाँपुर से फरार हो गये थे। उनके मन में
रूस जाने का विचार आया था। इसके लिए वे पहले काबुल जाना चाहते
थे। छापामारी के दौरान फसाहत हुसैन सब-इंस्पेक्टर ने बताया कि वे
अशफाक उल्ला खां के घर पांच बजे 26 सितम्बर, 1925 को गये। वे साथ
में एक सर्च वारन्ट लेकर गये थे। अशफाक उल्ला खां अनुपस्थित थे और
उनके भाई ने इंस्पेक्टर से कहा कि उन्होंने रिश्तेदार अब्दुल कादिर खान
डिप्टी कलेक्टर के यहां रात बिताई। सब-इंस्पेक्टर वहां भी गया, जिससे
अशफाक उल्ला को गिरफ्तार किया जा सके, परन्तु वे वहां भी आरोपी
को पाने में असफल रहे। अशफाक उल्ला के घर 12 बोर की बन्दूक, ढेर
सारी खाली-खाली गोलियां, एक सही गोली और चार झोले छोटी
गोलियां प्राप्त हुईं। बन्दूक अब्दुल कादिर खान की थी और एक लाइसेंस
मिला, जिसमें अशफाक उल्ला के भाई का नाम था। बन्दूक और गोली
का मिलना यह प्रदर्शित करता है कि अशफाक उल्ला की पहुंच गोली एवं
बन्दूक तक है।¹
उसी दिन (26 सितम्बर, 1925) प्रेम किशन खन्ना, इन्द्र भूषण मित्र,
हरगोविन्द और बनारसी लाल को पकड़ लिया गया। ठाकुर रोशन सिंह
भी पुलिस की पकड़ में आ गये। कानपुर में कांग्रेस कार्यालय सहित
क्रांतिकारी वीरभद्र तिवारी और 'प्रताप' समाचार पत्र के सहायक सम्पादक
सुरेश चन्द्र भट्टाचार्य के यहां छापे मारे गये।
- सी०आई०डी० वाल्यूम-2, काकोरी षड्यन्त्र केस, उ०प्र० राजकीय अभिलेखागार,
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