अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइस घोषणा के इस्तहार प्रत्येक रेलवे स्टेशन और पुलिस थाने पर चस्पा
कर दिये गये थें।¹ पुलिस ने एकाएक संदिग्ध व्यक्तियों के घरों पर छापे
मारे, जिससे पुलिस को महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे, जिसके द्वारा उन
व्यक्तियों का क्रांतिकारी गतिविधियों से सम्पर्क होने का पता लगता था।
जब गोविन्द चरण को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया, तो उनके
कमरे से पार्टी के संविधान का पीला कागज प्राप्त हुआ।² 26 सितम्बर,
1925 की प्रातः चार बजे समूचे प्रान्त की पुलिस ने एक साथ छापा मारा,
जिसमें अनेक व्यक्तियों को एक साथ गिरफ्तार किया गया किन्तु अशफाक
उल्ला खां, चन्द्रशेखर आजाद, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी और शचीन्द्र नाथ
बख्शी उसी दिन गिरफ्तार नहीं किये जा सके।³ राम प्रसाद बिस्मिल उसी
दिन अवश्य गिरफ्तार हो गये। राम प्रसाद बिस्मिल ने इसका जिक्र किया
है - ‘‘रात्रि के समय ग्यारह बजे के लगभग एक मित्र के यहां से अपने
घर पर गया। रास्ते में खुफिया पुलिस के सिपाहियों से भेंट हुई। कुछ
विशेष रूप से उस समय भी वे मेरी देखभाल कर रहे थे। मैंने कोई
चिन्ता न की और घर पर जाकर सो गया। प्रातः काल चार बजने पर
जगा, शौचादि से निवृत होने पर बाहर द्वार पर बन्दूक के कुन्दों के शब्द
सुनाई दिये। मैं समझ गया कि पुलिस आ गयी है। मैं तुरन्त ही द्वार
खोलकर बाहर आया। एक पुलिस अफसर ने बढ़कर हाथ पकड़ लिया। मैं
गिरफ्तार हो गया। मैं केवल एक अंगोछा पहने हुए था।’'⁴ पुलिस ने घर
की तलाशी ली परन्तु कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली लेकिन
बिस्मिल की तलाशी लेने पर जेब से कुछ पत्र मिल गये, जो उन्होंने
लिखे थे।
- दे लिव्ड डेन्जरसली, मन्मथनाथ गुप्त, पृष्ठ -144
- कार्यवाही काकोरी षड़यंत्र केस अपील - पृष्ठ -37
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -77
- पूर्वो, राम प्रसाद बिस्मिल, पृष्ठ -92-93
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