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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 140, कुल 297 में से

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इधर सरकार के लिए यह डकैती प्रतिष्ठता का प्रश्न बन गयी। जांच दल
को ट्रेन डकैती के तीन नोट शाहजहांपुर में मिले। पुलिस को यह भी
पता चला कि 8, 9, 10 अगस्त, 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल शाहजहांपुर
में नहीं थे। अब पुलिस ने जांच में तीव्रता दिखाई। मालूम हुआ कि
शाहजहांपुर के गवर्नमेण्ट हाईस्कूल के एक विद्यार्थी इन्द्र भूषण मिश्र के
पास बिस्मिल के क्रांतिकारी दल संबंधी पत्र आते थे, जो वह बिस्मिल को
देता था। इन्हीं पत्रों के आधार पर हार्टन को मेरठ में 13 सितम्बर, 1925
को होने वाली बैठक की जानकारी मिली। इस बैठक में एक श्राद्ध का
जिक्र था।
<u>मेरठ की बैठक</u> - काकोरी ट्रेन डकैती के उपरान्त संगठन को अधिक
सक्रिय बनाने के लिए राम प्रसाद बिस्मिल ने मेरठ अनाथालय में 13
सितम्बर, 1925 को एक बैठक बुलाई थी, जिसमें दल की केन्द्रीय समिति
तथा कुछ जिला संगठन के विशिष्ट कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया
था। बिस्मिल ने एक पत्र अंग्रेजी में लिखा था - उसका हिन्दी अनुवाद
निम्नवत् है -
‘‘ मेरे प्यारे,
हम अच्छी तरह से हैं। सम्भवतः आपको मालूम ही होगा कि हमारे
पितामह का श्राद्ध संस्कार इस महीने की तेरहवीं तारीख (रविवार) को
होगा। उसमें आपकी उपस्थिति अनिवार्य है। अतः मेरा निवेदन है कि
नियत समय पर पहुंचे और कृतार्थ करें।
आपका
रुद्र
पुनश्चः -कृपया इस महीने की बारहवीं तारीख को दिल्ली के लिए
प्रस्थान करें। वहां से आपको आसानी से गाड़ी मिल जायेगी।
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