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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 297 में से

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पृष्ठ 139

अध्याय-सात
काकोरी काण्ड के बाद की स्थिति का अध्ययन
जांच : काकोरी काण्ड को सरकार ने एक खुली चुनौती के रूप में
लिया। सरकार पूरी तरह सावधान हो गयी। सरकार के दो महत्वपूर्ण
विभाग सक्रिय हो गये, ये विभाग थे पुलिस और गुप्तचर विभाग। ऐसी
रोमांचकारी घटना पहले कभी सुनी नहीं गयी थी। अतः सबका चकित
होना स्वाभाविक। इसमें किसी मुसाफिर को लूटने का प्रयास नहीं किया
गया था। लखनऊ के मुख्य चीफ कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने अपने
फैसले में इस डकैती को भारत की अनोखी डकैती बतलाया।¹
यह घटना सरकार के लिए एक चुनौती थी। इस ट्रेन डकैती का
पता लगाने के लिए सरकार द्वारा हार्टन की अध्यक्षता में एक विशेष
पुलिस इकाई गठित की गयी। सरकार के सौभाग्य से हार्टन को सफलता
मिलने लगी थी।² घटना स्थल पर मिले साक्ष्यों से रेलवे पुलिस की
रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यह जांच दल इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि
यह कार्य क्रांतिकारियों का ही हो सकता है। सरकार इसे राजनैतिक डकैती
मानती थी। मन्मथनाथ गुप्त ने लिखा है- ''अशफाक ने जो भविष्यवाणी
की थी, वह सत्य ही सिद्ध हुई। हमने जो कहा था कि हम सरकारी
खजाना लूटना चाहते हैं, किसी यात्री से लूटमार करना हमारा उद्देश्य
नहीं है, उससे हमारा राजनीतिक रूप सामने आ गया था। यों तो पुलिस
वाले बड़े आलसी और धीरे काम करने वाले होते हैं, पर इस सूचना से
उनमें बिजली सी दौड़ गयी।'' स्पष्ट है कि क्रांतिकारी पुलिस वालों को
मूर्ख और अयोग्य समझते थे और

  1. पूर्वो, बनारसी दास चतुर्वेदी, पृष्ठ -11
    2.स्वतंत्रता आन्दोलन में जनपद शाहजहाँपुर का योगदान, एन०सी०मेहेरोत्रा, पृष्ठ 121
    111