अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइसके बाद सभी युवक चौक की ओर से लखनऊ शहर में प्रवेश
किये। क्रांतिकारियों ने शहर में इस रास्ते से प्रवेश इसलिए किया कि कोई
संदेह नहीं कर सकता था। रात्रि में अन्य स्थानों से जाने पर शक पैदा
हो सकता था और यह इलाका वेश्याओं का था और इधर रात भर चहल-पहल
रहती थी।
दल के नेता बिस्मिल पर संगठन की अर्थव्यवस्था का भार था।
लखनऊ पहुँचने पर राम प्रसाद बिस्मिल ने समस्त धनराशि अपने किसी
विश्वसनीय व्यक्ति के पास छिपा दी थी। इस विषय में अन्य किसी
सदस्य को जानकारी नहीं थी। इस कार्य के बाद सभी सदस्य
अपने-अपने परिचितों के यहाँ चले गये। चन्द्रशेखर आजाद और मन्मथ
नाथ गुप्त का लखनऊ में कोई परिचित नहीं था और वे एक पार्क में
जाकर सो गये।¹ इस काण्ड की सूचना समाचार पत्रों को रात्रि में ही मिल
गयी थी। मन्मथनाथ गुप्त ने लिखा है - ''जब प्रातः काल भक्तगण
गोमती में स्नान करने के लिए जा रहे थे, इस समय हम अपने गुप्त
स्थानों से प्रकट हुए। थोड़ी देर में हम सड़क की बढ़ती हुई जनता में
मिल गये। इसके बाद हमने सुना कि उस समय लखनऊ के प्रसिद्ध
'इण्डियन डेली टेलीग्राफ' के हॉकर जोर-जोर से चिल्ला रहे थे - 'काकोरी
के पास सनसनीपूर्ण ट्रेन डकैती।' मैंने इस अखबार की एक प्रति खरीदी
और प्रातः काल की धुँधली रोशनी में इस घटना की कई कालमों की
विस्तृत अजीबोगरीब रिपोर्ट पढ़ी। इस रिपोर्ट से हमें ज्ञात हुआ कि तीन
व्यक्ति, जिसमें एक गोरा भी था, मारे गये। हमें इन हत्याओं के संबंध में
कुछ पता नहीं था। चूँकि उस समय मैं एक आतंकवादी ऐडवेन्चरिस्ट था।
इसलिए मैंने इस खबर का स्वागत किया, कि इस अवसर पर एक गोरा
मारा गया है, किन्तु दो भारतीयों की हत्या से मुझे दुः ख हुआ।
- अशफाक उल्ला खां, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-71
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