अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऔर हर मिनट उस गाड़ी का शब्द धीमा होता चला गया।''¹
अशफाक उल्ला खां का कृतित्व ही ऐसा था कि जहां बल का काम
हो बिना अशफाक के सम्भव कहाँ। अशफाक के पास भीमबल था।
अनेक इतिहासकारों, टिप्पणीकारों ने उनके इस अद्भुत बल शौर्य का
बखान किया है। ............रेल रोकने और तिजोरी लूटने में मात्र दस
मिनट का समय लगा होगा। यह अशफाक के कारण ही हुआ कि कार्य
में सफलता मिली। यह भी ज्ञातव्य है कि उसी ट्रेन में चौदह पुरुष ऐसे थे,
जिनके पास बन्दूके थीं या रायफलें थीं। दो सशस्त्र अंग्रेजी फौजी जवान
भी थे परन्तु सब शान्त रहे। ड्राइवर और इंजीनियर का बुरा हाल था। ये
दोनों अंग्रेज थे। ड्राइवर महाशय इंजिन में लेट गये थे और इंजीनियर
साहब पाखाने में जा छिपे थे।² मुसाफिर भी डरे थे, वे समझ बैठे थे कि
गाड़ी को लगभग चालीस आदमियों ने घेर लिया है। केवल दस युवकों
ने इतना बड़ा काण्ड कर डाला। साधारण रूप से विश्वास नहीं होता था,
लेकिन यह सत्य था कि राम प्रसाद बिस्मिल के कुशल नेतृत्व में और
अशफाक के भीमबल के कारण खजाना लूट लिया गया और इस
असाधारण कार्य को परिणाम तक पहुँचा दिया गया। रूपये की थैलियों
को बाँध लेने के बाद बिस्मिल ने सभी सदस्यों को सावधान किया कि वे
स्थान को अच्छी तरह देख लें कि कोई वस्तु छूट तो नहीं गयी। इसके
बावजूद एक सदस्य अपनी चादर वहीं भूल आया था। यात्रियों को धोखा
देने के लिए क्रांतिकारी पहले तो विपरीत दिशा में भागे परन्तु झाड़ियों में
लुप्त होने के बाद सभी एक साथ लखनऊ की ओर मुड़ गये। लूटे हुए
रूपये चमड़े के थैलों में थे। रास्ते में ये रूपये निकाल लिए गये और
थैलों को खाली ही बरसात में रुके हुए पानी के गड्ढों में डाल दिये।
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान् सिंह राणा, पृष्ठ -68
- राम प्रसाद बिस्मिल, रचनावली सम्पादक, दिनेश शर्मा, पृष्ठ -3
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