सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 297 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 132

यात्रियों को ट्रेन के अन्दर रखने के लिए बराबर गोलियां दागी जा
रही थी।''¹ मन्मथ नाथ गुप्त ने आगे भी इसका वर्णन करते हुए लिखा
है - ‘‘हिमगिरी की तेजी से रेल हमारी तरफ दौड़ी आ रही थी। रेल की
आवाज चारो तरफ छाई हुई थी। आखिर क्या होने वाला है? मृत्यु ?
कौन जानता है क्या होगा? पर अब हमें कोई भय नहीं था। उसी समय
राम प्रसाद ने देखा कि जहाँ हम खड़े थे, वहाँ डबल लाइन थी। एकाएक
उनको याद आया कि पंजाब मेल आ रही है और इसमें कोई संदेह नहीं
था कि यह रात वाली पंजाब मेल थी। उन्होंने यह बात हमें बता दी।
हमारे नेता सामने मौजूद थे। उनकी तात्कालिक बुद्धि बड़ी प्रखर थी।
उन्होंने इससे पहले खतरों की स्थिति से निकाला था। क्या यह बात सच
नहीं थी कि इससे पहले हर मौके पर उन्होंने इससे भी गम्भीर स्थिति में
सही फैसले किये थे। शायद वे हमसे कहें कि लौट चलो या कहें कि पास
के पेड़ों के पीछे हो जाओ और वहाँ से जबरदस्त मोर्चा सम्भालो।‘’
‘‘आती हुई गाड़ी पास पहुँचने ही वाली थी। ऐसे मौके पर बिस्मिल ने
हमसे कहा कि हम अपने अस्त्रों को छिपा लें। उससे यह होगा कि यदि
कोई गाड़ी से झाँकेगा, तो हम लोगों को साधारण भटके हुए यात्रियों के
रूप में देखेंगे। उन्होंने अशफाक को इस प्रकार खड़े होने के लिए कहा
मानो वे कोई दृश्य देख रहे हों। गाड़ी बहुत तेजी से आ रही थी और
चारो तरफ उसका शोर था। एक लम्हे के अन्दर गाड़ी हमारे सामने से
निकल गयी और सारी स्थिति एक दुः स्वप्न की तरह होकर चली गयी।
अब वह एक गोली की तरह अगले स्टेशन की ओर जा रही थी। हमारे
चेहरों पर तथा हमारी गाड़ी पर तेज रोशनी गिरी, बहुत जोर से दोनों
गाड़ियों की हवाएं टकरायीं और देखते-देखते सब खत्म हो गया। इस
प्रकार यह खतरा टल गया

  1. अशफाक उल्ला खां, भवान सिंह राणा, पृष्ठ-67
    105