अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरोककर उसमें आने वाला रेल खजाना लूट लिया जाए। काकोरी स्टेशन
के पास एक वीरान जगह चुन ली गई थी। सारी तैयारियां गुपचुप,
लेकिन बड़ी सरगर्मी के साथ होती रहीं। पर अशफाक अब भी इस डाके
का विरोध करते रहे। यह मानना पड़ेगा कि वह बहुत दूर की चीज सोच
रहे थे। उनका कहना था कि हमारा दल अभी इतना मजबूत नहीं है कि
हम ब्रिटिश सरकार को खुली चुनौती दे सकें। अभी हम इस हालत में
नहीं हैं कि हम सरकार से सीधी लड़ाई छेड़कर दल को कायम रख सकें।
लेकिन सब जोश के मारे फड़क रहे थे, और अशफाक उल्ला की बात
नक्कार खाने में तूती की आवाज बनकर रह गयी।''¹
मन्मथ नाथ गुप्त ने आगे लिखा कि - '.......एक महत्वपूर्ण बात
यह थी कि यों तो अशफाक उल्ला सरकारी खजाने की डकैती के विरोधी
थे, पर जब उन्होंने देखा कि उनकी एक न चली और क्रांतिकारी इस
काम को करने पर ही तुले हैं, तब उन्होंने भी कमर कस ली। उनकी
सुन्दर बड़ी-बड़ी आँखे तेज से दीप्त हो उठीं ओर वह अपना पार्ट अदा
करने के लिए अत्यन्त साहस तथा प्रसन्नता से प्रस्तुत हो गये। उनका
विरोध किसी डर या भय से प्रेरित न था, बल्कि वह बुद्धिमत्ता की
आवाज थी। बाद के इतिहास ने सिद्ध कर दिया कि अशफाक सही थे
और बाकी सभी क्रांतिकारी गलती पर थे। यह बात तो निश्चित है कि
यदि हम इस कार्य को न करते तो इतनी जल्दी हमारे पांव न उखड़ते।''²
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -61
- भारतीय क्रांतिकारी आन्दोलन का इतिहास, मन्मथनाथ गुप्त, पृष्ठ-
209-210
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