अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्रांतिकारी दल की मुख्य समिति ने बिस्मिल की योजना को
स्वीकृति दे दी। इसके बाद भी अशफाक बार-बार बिस्मिल को इस कार्य
के सम्भावित घातक परिणामों से सचेत करते रहे। लेकिन अब तो जो हो
गया सो हो गया। अब निर्णय को बदलना बिस्मिल के लिए भी असम्भव
था। अन्त में अशफाक को बिस्मिल ने सहमत कर लिया। अन्ततः
रेलगाड़ी लूटने की योजना बनाई गयी। योजना के प्रत्येक पहलू पर खूब
विचार किया गया। प्रथम चरण में यह निश्चित हुआ कि रेलगाड़ी जब
किसी छोटे स्टेशन पर खड़ी हो तो स्टेशन के तारघर पर अधिकार कर
लिया जाये।¹
अशफाक ने भले ही स्वीकार कर लिया लेकिन उनका भीतरी
व्यक्तित्व इस कार्य हेतु स्वीकृति नहीं देता था। वहीं चन्द्रशेखर आजाद
सबसे अधिक प्रसन्न थे। वे सरकार को खुली चुनौती देते हुए सीधी
टक्कर लेने में विश्वास रखते थे। यही कारण था कि योजना के सबसे
अधिक प्रबल समर्थक चन्द्रशेखर आजाद ही थे। चन्द्रशेखर आजाद जैसी
विचारधारा वाले संगठन के सदस्यों का मत था कि यदि गाड़ी का गार्ड,
ड्राइवर आदि अंग्रेज हुए तो उन्हें भी गोली मार दी जाये। बिस्मिल ऐसे
विचार से कतई सहमत नहीं थे। वे व्यर्थ की हत्या या रक्तपात के विरोधी
थे। अशफाक उल्ला खां तो प्रारम्भ से ही इस प्रकार की डकैती के विरुद्ध
थे।² वे चाहते थे कि क्रांतिकारी जो भी कार्य करें छिपकर करें।
क्रांतिकारी मन्मथ नाथ गुप्त जो स्वयं काकोरी काण्ड में सम्मिलित
हुए थे, वे अशफाक की असहमति पर लिखते हैं कि - 'इस बार एक बड़ी
योजना बनाई गई थी। यह तय किया गया कि लखनऊ के पास काकोरी
नामक स्थान पर 8 डाउन रेल को
- स्वतंत्रता आन्दोलन में शाहजहांपुर का योगदान, डॉ० एन०सी० मेहरोत्रा,
पृष्ठ-118 - स्वतंत्रता आन्दोलन में शाहजहांपुर का योगदान, डॉ० एन०सी० मेहरोत्रा,
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