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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 121, कुल 297 में से

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अशफाक का विरोध : -
रेल का खजाना लूटने की योजना राम प्रसाद बिस्मिल के दिमाग
की उपज थी। यह योजना जब दल के अन्य सदस्यों के सामने रखी
गयी, तो सबने इसे स्वीकार कर लिया और अब पूर्णरूप से रेल खजाना
लूटने की योजना बन गयी। किन्तु अशफाक इस योजना से सहमत नहीं
थे। अशफाक का स्पष्ट रूप से कहना था कि सरकारी खजाने पर धावा
बोलना उचित नहीं है, इसका अर्थ सरकार से सीधी टक्कर लेना है।¹
अशफाक ने नये कदम का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि जहाँ
तक चुनौती का सम्बन्ध है, इस काम से हम सरकार को चुनौती तो
अवश्य दे देंगे लेकिन पार्टी के अन्त का प्रारम्भ हो जायेगा। उन्होंने
साफ-साफ कह दिया कि अभी पार्टी बहुत कमजोर है और इस काबिल
नहीं है कि सरकार के साथ युद्ध कर सके। अशफाक ने यह भी कहा कि
जिस प्रकार यह प्रस्तावित काम करने का इरादा किया जा रहा है, इससे
फौरन सरकार को संदेह हो जायेगा और जल्द ही सरकार हमारे ऊपर टूट
पड़ेगी।² अशफाक कारण जानते थे कि दल के पास धन भी नहीं हैं और
न अन्य साधन। ऐसी स्थिति में सरकार से टक्कर लेना अपना ही सिर
फोड़ना है। अशफाक ने बहुत प्रयास किया कि उनकी बात मान ली
जाय। अशफाक जानते थे कि यह कार्य अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा
है। लेकिन अशफाक को सफलता न मिली। विरोध सार्थक था और इससे
अशफाक की दूरदर्शिता का पता भी चलता है। वे स्थायित्व में विश्वास
करते थे। वे कोई ऐसा कार्य नहीं चाहते थे, जिससे दल को भारी
नुकसान हो। यह विरोधात्मक स्वर भी अशफाक के व्यक्तित्व ही नहीं
कृतित्व को भी दर्शाता है।


  1. अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ -59
  2. जांबाज (पत्रिका), मन्मथनाथ गुप्त, पृष्ठ-3
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