अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 12, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंकि भूखी मछलियाँ हैं/जौहरे शमशीरे कातिल की।
आह! क्या ऐसे दौर की जिन्दगी प्यारी ख्याल की जा सकती है।
जबकि हमारे ही गिरोह-सियासी में खलफिशार मचा है। कोई तबलीग का
दिलददा है, जो कोई शुद्धि पर मर मिटने को बाइसेनिजात समझ रहा है।
मुझे तो रह-रहकर इन दिमागों और अक्लों पर तरस आ रहा है जो कि
बेहतरीन दिमाग हैं और माहरीने सियासत हैं। काश कि वह अज़ादिए
मिस्र की जद्दोजहद एहरारान मिस्र के कारनामें और बर्तानवी सियासी
चाले स्टडी कर लें और हमारे हिन्दुस्तान की मौजूदा हालत से मुकाबिला
व मवाज़ना करें, क्या ठीक वही हाल इस वक्त नहीं है। गवर्नमेंट के
खुफिया एजेन्ट प्रोपेगेंडा मजहबी बुनियाद पर फैला रहे हैं। इन लोगों का
मकसद मजहब की हिफाजत या तरक्की नहीं है बल्कि चलती गाड़ी में
रोड़ा अटकाना है। मेरे पास वक्त नहीं है न मौका है कि सब कच्चा
चिट्ठा खोलकर रख देता जो मुझे अय्यामे फरारी में और उसके बाद
मालूम हुआ है। यहाँ तक मुझे मालूम है कि मौलवी नियामतुल्ला
कादियानी कौन था कि काबुल में संगसार किया था। वह ब्रिटिश एजेन्ट
था। जिसके पास हमारे करमफरमा खान बहादुर, तसद्दुम हुसैन साहब
डिप्टी सुपरिटेंडेन्ट सी०आई०डी० गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया पैगाम लेकर गए थे
मगर बेदारमगज हुकूमत काबुल ने इलाज जल्द कर दिया और मर्ज को
फैलने न दिया। मैं अपने हिन्दुओं और मुसलमान भाइयों को बता देना
चाहता हूँ कि सब ढोंग हैं, जो सी०आई०डी० के खुफिया खजाने के रूपये
से रचा गया है। मैं मर रहा हूँ और वतन पर मर रहा हूँ। मेरा फर्ज है
कि हर नेको बद बात भाइयों तक पहुंचा दूँ। मानना न मानना उनका
काम है। मुल्क के बड़े-बड़े लोग इससे बचे हुए नहीं हैं। बस आवाम को
आँखे खोलकर इत्तबा करना चाहिए।
197