अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाइयों! तुम्हारी खानाजंगी तुम्हारी आपस में फूट, तुम दोनों में से
किसी के भी सूदमंद साबित न होगी। यह गैर मुमकिन है कि 7 करोड़
मुसलमान शुद्ध हो जाएँ और वैसे ही यह भी महमल-सी बात है कि 22
करोड़ हिन्दू मुसलमान बना लिए जाएं। मगर हाँ यह आसान है और
बिल्कुल आसान है कि यह सब मिलकर गुलामी का तौक गले में डाल
लें। ऐ वह कौम जिसका कोई कौमी झंडा नहीं-ऐ वह कि तेरा वतन मेरा
वतन नहीं-ऐ कि दूसरों की तरफ हाथ फैलाए हुए रहम की दरख्वास्त पर
नजर रखनेवाली बेकस कौम तेरी अपनी गलतियों का यही नतीजा है कि
आज तू गुलाम है और फिर वही गलतियाँ कर रही है कि आने वाली
नस्लों के लिए धब्बा गुलामी का छोड़ जाएगी कि जो भी सर जमीने हिन्द
पर कदम रखेगा, गुलामी में रखेगा और गुलाम बनाएगा। ऐ खुदावंदे
कुद्दूस क्या कोई ऐसा सबेरा नहीं आयेगा कि जिस सुबह को तेरा
आफताब आजाद हिन्दुस्तान पर चमके और फिजाए हिन्द आजादी के नारों
से गूँज उठे। कांग्रेस वाले हों कि सौराजिस्ट तलबीगवाले हो कि
शुद्धिवाले, कम्युनिस्ट हो कि रिवोल्यूशनरी, अकाली हो कि बंगाली, मेरा
पयाम हर फरजंदेवतन को पहुँचे। मैं हर शख्स को उसकी इज्जत व
मजहब का वास्ता देता हूँ। अगर वह मजहब का कायल नहीं तो उसके
जमीर को और जिसको भी वह मानता हो, अपील करता हूँ कि हर
काकोरी केस के मर जाने वाले नौजवानों पर तरस खाओ। और फिर
हिन्दुस्तान को सन् 20 व 21 वाला हिन्दुस्तान बना दो। फिर अहमदाबाद
कांग्रेस जैसा इत्तिहाद इत्तिफाक का नजारा सामने हो। बल्कि उससे
बढ़कर हो और मुकम्मल आजादी का जल्द-से-जल्द ऐलान करके इन गोरे
आकाओं को हटा दो कि ये अब केंचुली उतार चुके हैं और अब वह किसी
मंत्र से बस में न होंगे-तबलीग व शुद्धि वालो खुदारा-आंखें खोलो, कहाँ
थे और कहाँ पहुँच गये, अपनी-अपनी शान खत्म करो, सोचो तो मजहब
में जबरदस्ती इखतिलाफे राय पर जंग, एक काम नामुकम्मल छोड़कर
दूसरी तरफ रुजू हो गये।
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