अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 118, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंराम प्रसाद बिस्मिल पर क्रांतिकारी गतिविधियों का उत्तरदायित्व अधिक
था, लेकिन वे कर भी क्या सकते थे। संगठन को नियमित रूप से
सहायता देने वालों ने भी हाथ खींच लिया था। कई कार्यकर्ताओं के ऊपर
ऋण का बोझ हो चुका था, अनेकों ने खराब आर्थिक स्थिति के कारण
दल से सम्बन्ध विच्छेद कर लिया था।¹ राम प्रसाद बिस्मिल ने अपनी
जिम्मेदारी पर ऋण लेकर जिला कार्यकर्ताओं को मासिक व्यय हेतु धन
दिया किन्तु ऐसा करना हमेशा सम्भव नहीं था। उसी समय बंगाल में
आर्डीनेंस लागू हो गया, जिसके तहत कई कार्यकर्ता तुरन्त बन्दी बना
लिये गये। कार्यकर्ताओं में उदासीनता व्याप्त होने लगी। संगठन पर
भीषण आर्थिक संकट आ गया, जिसका वर्णन बिस्मिल ने इन शब्दों में
किया है- "इस समय समिति के सदस्यों को बड़ी ही दुर्दशा का सामना
करना पड़ रहा था। चने मिलना भी कठिन था। सब पर कुछ-न-कुछ
कर्ज हो गया था। किसी के पास साबुत कपड़े तक न थे। कुछ विद्यार्थी
बनकर धर्म क्षेत्रों तक में भोजन करते थे। चार-पांच सदस्यों ने
अपने-अपने केन्द्र त्याग दिये थे। पांच सौ से अधिक रूपये मैं कर्ज लेकर
व्यय कर चुका था। यह दुर्दशा देखकर मुझे बड़ा कष्ट होने लगा। मुझसे
भरपेट भोजन नहीं किया जाता था। सहायता के लिए सहानुभूति रखने
वालों का द्वार खटखटाया, किन्तु कोरा उत्तर मिला। किंकर्तव्यविमूढ़ था।
कुछ समझ में नहीं आता था। कोमल “दय नवयुवक मेरे चारों ओर
बैठकर कहा करते थे - 'पंडित जी अब क्या करें।' मैं उनके सूखे मुख
को देखकर बहुधा रो पड़ता था कि स्वदेश सेवा का वत लेने के कारण
उनकी फकीरों से भी बुरी दशा हो रही है। एक-एक कुर्ता तथा धोती भी
ऐसी नहीं थी, जो साबुत होती।
- अशफाक उल्ला खां, भवान सिंह राणा, पृष्ठ - 47
91