अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचौरी-चौरा की घटना पर महात्मा गाँधी ने अपना असहयोग
आन्दोलन वापस ले लिया, जिसके कारण युवा वर्ग बेचैन हो गया।¹ इसी
समय प्रसिद्ध क्रांतिकारी शचीन्द्र नाथ सन्याल ने एक क्रांतिकारी संगठन
बनाया। शचीन्द्रनाथ का मुख्य केन्द्र बनारस था। कुछ दिनों बाद
‘अनुशीलन समिति’ को भी मिला लिया गया। अब ‘हिन्दुस्तान
रिपब्लिकन एसोसिएशन’ या ‘हिन्दुस्तान गण- तांत्रिक संघ’ नामक
संगठन बना।² जिसका उद्देश्य था, क्रांति द्वारा राज्यों का एक गणतंत्रिक
संघ स्थापित करना। उद्देश्यों की पंक्ति में यह भी था कि संघ शोषण
रहित समाज की स्थापना करेगा। यह स्पष्ट होता है कि हिन्दुस्तान
गणतंत्रिक संगठन पर सोवियत संघ की क्रांति का प्रभाव था लेकिन
मन्मथनाथ गुप्त का मत था कि -‘‘यह सब बातें होते हुए भी यह नहीं
कहा जा सकता है कि इस विधान के बनाने वालों का आदर्श सोवियत
रूस या किसान मजदूर वर्ग का अधिनायकत्व था। इस षड्यंत्र के
सिलसिले में बहुत दिनों बाद जाकर अर्थात् जनवरी सन् 1925 में एक
क्रांतिकारी पर्चा बाँटा गया, जिसका नाम ‘The Revolutionary' था। उसमें यह
लिखा गया था कि हमारे सामने आधुनिक रूस का आदर्श है, किन्तु
लेखक ने इस वक्तव्य को बिना पूरी तरह समझे ऐसा लिखा था। जहाँ
उसमें यह बात थी कि रूस का आदर्श भी हमारे सम्मुख है, - वहाँ यह
बात भी थी कि प्राचीन ऋषियों मुनियों का आदर्श भी हमारे सम्मुख है।
इससे भी यही ज्ञात होता है कि प्राचीन ऋषियों का आदर्श उनके सम्मुख
था।
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ 41
- अशफाक उल्ला खाँ, भवान सिंह राणा, पृष्ठ 42
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