अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 110, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंउन्हें अपने कर्म से डिगा नही पाता। अशफाक प्रयास करते हैं कि
वे क्रांतिकारी बनें। राम प्रसाद बिस्मिल ने उनके प्रयास को स्वीकार ही
नहीं किया है, सराहा भी है। अशफाक को कितना सच्चा और शुद्ध
मनुष्य समझते थे राम प्रसाद बिस्मिल यह भी स्पष्ट हो जाता है। यह
भेदभाव से परे साम्प्रदायिक एकता ही नहीं वरन् एक मानवीय समाज की
संरचना की ओर संकेत भी हैं। अशफाक घृणा से घबराते नहीं है, शान्ति
के साथ मुस्कराते हुए उसका सामना करते हैं। भावनाओं की जीत होती
है। निश्चित ही अशफाक के भीतर एक सामाजिक विचारधारा प्रवाहित हो
रही थी, जो देश भक्ति की नदी में बह रही थी।
अशफाक कट्टर मुसलमान ही नहीं वे हिन्दू-मुस्लिम एकता के भी
कट्टर समर्थक थे। भाषा का भेद भी नहीं था, अशफाक हिन्दी जानने
की कोशिश करते और बिस्मिल से उर्दू में लिखने को कहते। यह चीज
अशफाक को महान बनाती है। अशफाक राम प्रसाद बिस्मिल के सम्पर्क
में सच्चे देश भक्त तो बन ही गये, एक सुसंस्कृत, सुसभ्य, अच्छे इन्सान
भी बन गये। वे सिर्फ मनुष्य के लिए निर्मित हो गये।
1920 में जब क्षमादान दिया गया तो राम प्रसाद बिस्मिल का अन्य
क्रांतिकारियों से लगभग सम्बन्ध समाप्त हो गया और क्रांतिकारी
गतिविधियाँ भी प्रायः समाप्त हो गयी।
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