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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 297 में से

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पृष्ठ 108

पढ़ सके? तुमने स्वदेश-भक्ति के भावों को भलीभांति समझने के लिए
हिन्दी का अच्छा अध्ययन किया। अपने घर पर जब माता जी तथा भ्राता
जी से बातचीत करते थे, तो तुम्हारे मुँह से हिन्दी शब्द निकल जाते थे,
जिससे सबको बड़ा आश्चर्य होता था।"
राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक के बारे में आगे लिखते हैं -
"तुम्हारी इस प्रकार की प्रवृत्ति देखकर बहुतो को संदेह होता था, कि
कही इस्लाम धर्म त्यागकर शुद्धि न करा लो। पर तुम्हारा हृदय तो किसी
प्रकार अशुद्ध न था, फिर तुम शुद्धि किस वस्तु का कराते? तुम्हारी इस
प्रकार की प्रगति ने मेरे हृदय पर पूर्ण विजय पा ली। बहुधा मित्र मण्डली
में बात छिड़ती कि कहीं मुसलमान पर विश्वास करके धोखा न खाना।
तुम्हारी जीत हुई, मुझमें तुममें कोई भेद न था। बहुधा मैंने तुमने एक
थाली में भोजन किए। मेरे हृदय से यह विचार ही जाता रहा कि
हिन्दू-मुसलमान में कोई भेद है। तुम मुझ पर अटल विश्वास तथ अगाध
प्रीति रखते थे। हाँ तुम मेरा नाम लेकर नही पुकार सकते थे। तुम मुझे
सदैव 'राम' कहा करते थे। एक समय जब तुम्हें हृदय कम्प का दौरा हुआ
था, तुम अचेत थे, तुम्हारे मुँह से बराबर 'राम' 'हाय राम' शब्द निकल
रहे थे। पास खड़े हुए भाई बांधवों को आश्चर्य हुआ कि 'राम' 'राम'
कहता है। कहते कि 'अल्लाह' 'अल्लाह' कहो, पर तुम्हारी 'राम-राम' की
रट थी। उसी समय किसी मित्र का आगमन हुआ, जो राम के भेद को
जानते थे। तुरन्त मैं बुलाया गया। मुझसे मिलने पर तुम्हें शान्ति हुई।
तब सब लोग 'राम! राम!' के भेद को समझे।
अन्त में इस प्रेम, प्रीति तथ्य मित्रता का परिणाम क्या हुआ? मेरे
विचारों के रंग में तुम भी रंग गये। तुम भी एक कट्टर क्रांतिकारी बन
गये। अब तो तुम्हारा दिन रात प्रयत्न यही था कि, कि किस प्रकार हो
मुसलमान नवयुवकों में भी क्रांतिकारी भावों का प्रवेश हो। वे भी
क्रांतिकारी आन्दोलन में सहयोग दें। जितने तुम्हारे बन्धु तथा मित्र थे सब
पर तुमने अपने विचारों का प्रभाव डालने का प्रयत्न किया। बहुधा
क्रांतिकारी सदस्यों को भी बड़ा आश्चर्य होता कि मैंने कैसे एक मुसलमान
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