अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)
Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works
अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
पृष्ठ 104, कुल 297 में से
संदर्भ में पढ़ेंअभियोग के दौरान राम प्रसाद बिस्मिल फरार थे। मैनपुरी षड्यंत्र
के कैदी मुकुन्दीलाल को क्षमा नही किया गया। उन्हें पूरी सजा काटनी
पड़ी, वे 1923 में जेल से रिहा हुए। क्षमा की घोषणा होने के बाद
बिस्मिल शाहजहाँपुर आ गये। यहाँ आने पर राम प्रसाद बिस्मिल ने
समाज के बदले हुए तेवर को देखा। उनके पास कोई खड़ा भी नहीं होता
था। कोई बात भी नही करता था, पुलिस की निगाह हर जगह गड़ी
रहती थी। राम प्रसाद बिस्मिल ने लिखा है -
‘‘राजकीय घोषणा के पश्चात् जब मैं शाहजहाँपुर आया तो शहर की
अद्भुत दशा देखी। कोई पास तक खड़े होने का साहस न करता था।
जिसके पास मैं जाकर खड़ा हो जाता था, वह नमस्ते कर चल देता था।
पुलिस वालों का बड़ा प्रकोप था। प्रत्येक समय छाया की भाँति पीछे-पीछे
छिपा करती थी। इस प्रकार का जीवन कब तक व्यतीत किया जावें।’’¹
राम प्रसाद बिस्मिल को निराशा तब हुई जब ‘‘मातृवेदी’’ संगठन
बिखर गया। यह संगठन स्थानीय क्रांतिकारियों का प्राण था। इसी समय
वे साथी क्रांतिकारियों से कटु अनुभव भी प्राप्त किये। अब बिस्मिल स्वतंत्र
रूप से रेशमी कपड़ा बुनने का उद्योग चलाने लगे। अशफाक को यह पता
चला कि शाहजहाँपुर के एक क्रांतिकारी राम प्रसाद वर्मा के नाम का भी
गिरफ्तारी का वारन्ट है। राम प्रसाद बिस्मिल के प्रशंसक अशफाक की
खुशी का ठिकाना न रहा। बिस्मिल के शाहजहाँपुर आने पर अशफाक
उनसे मिलने का यत्न करने लगे और वह दिन आया-एक दिन अशफाक
राम प्रसाद बिस्मिल से मिले किन्तु यह क्या! स्कूल का एक सामान्य
मुसलमान विद्यार्थी समझकर बिस्मिल ने कोई उत्साहजनक या प्रेरणादायक
बात नहीं की।
- राम प्रसाद बिस्मिल रचनावली, सम्पादक दिनेश शर्मा, पृष्ठ-73
78