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अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

अमर शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ: व्यक्तित्व और कृतित्व (काकोरी के अमर शहीद का जीवन व रचनाएँ)

Amar Shaheed Ashfaqulla Khan: Personality & Works

अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ 'वारसी' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished297 पृष्ठ

पृष्ठ 100, कुल 297 में से

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दुनिया में इन्कलाब का तगट्युरात कितनी तेजी से हुआ करते हैं।
कल मैं क्या था और आज मैं क्या हूँ। कल मैं तुर्की की हुकूमत अपने
ऊपर बायसेसद नाजो इफितखार और जरिए बख्शिश समझता था और
आज बदतरीन जिल्लत। आज मैं हर विदेशी हुकूमत को बुरा समझता
हूँ।'' अशफाक को अपने हिन्दू अध्यापक से शिकायत थी और संकीर्ण
विचारों से उन्हें दुख था। यही भावना उन्हें देश प्रेम की ओर ले जाती
है। भेदभाव की प्रदूषित मानसिकता को वे शत्रु समझते हैं। यही कारण
भी था हम गुलाम हुए। भेद-भाव हमारी विकास यात्रा का अवरोधक है,
यह अशफाक उल्ला जानते थे। शायद यही कारण था कि एक कट्टर
मुस्लिम परिवार के होते हुए भी अशफाक की मानसिक संरचना सामाजिक
हो सकी। सामाजिक विचारों के अंकुर फूटने लगे थे। साम्प्रदायिक एकता
के तो वे उदाहरण मात्र थे। आगे चलकर अशफाक की समझ में बढ़ोत्तरी
हुई तो पता चला कि अध्यापक ही राष्ट्र का निर्माता है। वह एक ऐसे
दिमाग में उपकरण सजाता है जहाँ रिक्त है सब कुछ और जब वही
संकीर्ण मानसिकता की बीमारी से राष्ट्र या पीढ़ी का निर्माता ग्रसित रहेगा
तो समाज का भविष्य कैसा होगा। जबकि अध्यापक को बिना किसी
भेदभाव के राष्ट्र की एकता के लिए मस्तिष्क तैयार करना चाहिए ताकि
एक सुसभ्य, सुसंस्कृत समाज बनाया जा सके। अशफाक की दृष्टि में
अध्यापक ही ऐसा प्राणी है जो सामाजिक बुराइयों को दूर कर सकता है।
यह ज्ञातव्य है कि अशफाक को युद्ध विषयक पुस्तकें पढ़ने का
बचपन से ही शौक था। आगे चलकर वे बंगाल के क्रांतिकारियों के विषय
में भी बाकायदा सुन रखे थे। वे समाचारों से अवगत होते रहते। यह भी
ज्ञातव्य है कि बंगाली क्रांतिकारी ही उ०प्र० की क्रांतिकारी गतिविधियों में
महत्वपूर्ण योगदान निभा रहे थे। अशफाक कन्हाई दत्त और खुदीराम
बोस के कार्यों से बहुत ज्यादा प्रभावित थे।

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