सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 91, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 91

३८ आल्हाखण्ड । ८६
कउ कउ घोड़ा हिरन चालपर कउ कउ मोर चालपर जायँ ॥
कावा घूमैं कउ कउ घोड़ा कउ कउ सर्पटरहा चलाय १३०
सजा रिसाला घोड़नवाला पैदर होन लागि तय्यार ॥
झीलम वख्तर पहिरि सिपाही हाथम लीन ढाल तलवार १३१
मेघागर्ज्जनि बिजुली तड़पनि तोपैं सबै भईं तय्यार ॥
मारू डंका बाजन लागे बिप्रन कीन वेद उच्चार १३२
रणकी मौहरि बाजन लागी घूमन लागे लाल निशान ॥
गर्द उड़ानी है पृथ्वी में छाई रई तुरत असमान १३३
और बयरिया डोलन लागी औरै होन लाग व्यवहार ॥
सजा डलरुवा यहु अनुपी का ज्यहिकानेकुनलागी बार १३४
लोग चढ़ाई त्यहि रेशम की कम्मर दुइ बांधी तलवार ॥
अगल बगल पर दुइ पिस्तौलैं दहिने हाथे लीन कटार १३५
बाँयें भाला नागदवनिका दहिने परी गैंडकी ढाल ॥
सुरखा घोड़ाको मँगवायो मनमेंसुमिरयोअवधसुवाल १३६
माथ नवायो श्रीगणेश को औ सुर्यनको कीन प्रणाम ॥
सुमिरि भवानी शिवशंकर को लीन्ह्योकृष्णचन्द्रकोनाम १३७
टोंडरमल दहिने पर आये सब्जा घोड़े पर असवार ॥
कूच के डंका बाजन लागे सबदलतुरतभयोहुशियार १३८
कूच करायो टोंडरपुर ते बबुरी बनै पहुंचे आय ॥
सुनि सुनि डंकाके शब्दन को चौंका तुरत लहुरवाभाय १३६
हुकुम लगायो निज फौजन में क्षत्री तुरत भये हुशियार ॥
झीलमबख्तर पहिरिसिपाहिन हाथम लई ढाल तलवार १४०
घोड़ा मनोहरा की पीढ़ीपर देवा तुरत भयो असवार ॥
चढ़ा बेंदुला की पीढ़ीपर यहुद्यावलिकोराजकुमार १४१