आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६ आल्हखण्ड । ८४
योगी आये म्वरे महलन में तिनका हारदीन पहिराय ॥
सुनिकै बातें ये माता की राजै खबरि जनायो आय १०६
धोखे योगिनके भूल्यो ना वै राजन के राजकुमार ॥
घरघर लूटा तिन माड़ो भल वै लैगये नौलखाहार १०७
सुनिकै बातें ये करिया की जम्बै हुकुमदीन फरमाय ॥
पकरिलय आवोतुम योगिनको हमरी नजर गुजारोआय १०८
उनहीं पाँयन करिया चलिभो अपनी लिहे ढाल तलवार ॥
जायकै पहुँचा पचपेड़ा तर गरई हांकदीन ललकार १०६
तुम्हें बुलावत महराजा हैं योगिउ चलो हमारे साथ ॥
लौटैकेरी म्वहिं आज्ञा ना हमरे सत्य सुमिरनी हाथ ११०
सुनिकै बातें ये योगिनकी करिया खैंचिलई तलवारी ॥
पाँव अगाड़ी को डारयो जो खण्डाकरों तुरतही चारि १११
बातें सुनिकै ये करिया की ऊदन खैंचिलीन तलवारी ॥
धोखे योगी के भूले ना नहिंशिरकाटिदेउँभुइँडारि ११२
आल्हा मलखे देवा सय्यद इनहुन खैंचिलई तलवार ॥
दौरे करियाके ऊपर सब गरई हांकदेत ललकार ११३
करिया सोच्यो अपने मनमाँ ये नहिं योगिनकेर कुमार ॥
ये हैं लड़िका मोहवे वाले एक ते एक शूरसरदार ११४
जो हम बोलैं इन योगिनते तौ फिरिजाय प्राणपर आय ॥
यहै सोचिकै करिया लौटौ जम्बाढिगै पहुँचा जाय ११५
हाथ जोरिकै करिया बोलो दादा मानो कही हमार ॥
धोखे भूल्यो ना योगिनके वै द्यौवलिके राजकुमार ११६
सुनिकै बातें ये करिया की बोला माड़ोका सरदार ॥
तुरत नगड़ची को बुलवावो फौजैं सबै होयँ तय्यार ११७