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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 84

माड़ोका युद्ध । ७६ ११
पाग बैंजनी शिरपर बाँधे ठाढ़े रहौ बनाफरराय ४७
धक्का मार्यो म्वारि छाती मा चोली मसकि गई त्यहितॉय ॥
तब हम चितई दिशितुम्हरीका औ यह मनै लीन ठहराय ४८
ब्याही जैवै की ऊदन सँग की मरिजाव जहरको खाय ॥
इतना सुनिकै ऊदन चलिभे अंटा उपर पहुँचे जाय ४६
सेज बिछायो सो जल्दी सों तब यह कह्यो बनाफरराय ॥
क्वारी कन्या की सेजिया पर ऊदन कबों धरै ना पाँय ५०
मूड़ मुड़ावा तुम्हरे कारण घर घर अलख जगावा आय ॥
पहिले अरुझे को सुरझावो पाछे सेज बिछायो जाय ५१
हाल बताओ सब माड़व का जासों लेयँ बापका दायँ ॥
चोरी चोरा लैजैबै ना साँचेहाल दीन बतलाय ५२
तेहाराखी रजपूती का गुदड़ी अबों परी तलवार ॥
हमको चाहो हाल बताओ नहीं तजो प्रीति का तार ५३
सुनिकै बातैं बघऊदन की बोली तुरत बिजैसिनि नारि ॥
किरिया करिल्यो श्रीगंगा की याही लगे मोरि है आरि ५४
सुनिकै बातें ये कन्या की तुरतै खैंचिलीन तलवार ॥
बिना बियाहे तुमका छाँड़ों तो मोहिं लागै पाप अपार ५५
सुनिकै बातें उदयसिंह की कन्या कह्यो बचन शिरनाय ॥
किला कठिन है लोहागढ़का तहँ नाजयो बनाफरराय ५६
पनिहासोते लों खंदक हैं जम्बा करै तहाँ को राज ॥
गर्भ गिराविनि - तहँ तोपै हैं वहँ नहिं सरै तुम्हारोकाज ५७
किला कठिन है फिरिझांसीका जहँ पर रहै करिंगाभाय ॥
किला तीसरे सूरज भैया तहौं न जयो बनाफरराय ५८
तोप लगावो बबुरी बनमा तौ मिलिजाय बापका दायँ ॥