आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंयोगिनिस्वयम्बर। ५
जायकै पहुँच्यो कोतवाल ढिग औ सबखबरिसुनायो जाय २९
पाय इत्तिला द्वारपाल सों तुरतै अटा भवन में आय ॥
सावधान ह्वै हाथ जोरिकै मन्त्रिहिशीश नवायोजाय ३०
ठाढ़े देख्यो कोतवाल को मन्त्री हुकुम दीन फर्माय ॥
मंच गड़ावो दिशि पूरब में मारग साफ करावो जाय ३१
हुई स्वयम्बर संयोगिनि का पुर में डोंड़ी देव पिटाय ॥
झण्डा गाड़ो राजमहल में बन्दनवार देव बँधवाय ३२
सुनिकै बातें ये मन्त्री की तुरतै कोतवाल चलिजाय ॥
फलम दवाइति कागज लैकै सीताराम चरण मनध्याय ३३
चिट्ठी लिखिकै सब राजन को मन्त्री धावन लीन बुलाय ॥
दै दै चिट्ठी हरकारन को राजन न्यवत दीन पहुँचाय ३४
साजि सांडिया को जल्दी सों धावन तुरत भये असवार ॥
चिट्ठी लैकै महाराजा के पहुँचे राजन के दर्बार ३५
चिट्ठी पावत महाराजा के राजा सबै भये हुशियार ॥
अपनी अपनी सब फौजन को राजन तुरत कीन तय्यार ३६
बाजे डंका अहतंका के बंका चलत भये नरपाल ॥
मारु मारु करि मौहरि बाजीं बाजीं हाव हाव करनाल ३७
ढाढ़ी करखा बोलन लागे बन्दिन कीन समरपद गान ॥
दान मान दै सब बिप्रन को राजन कीन तुरत प्रस्थान ३८
खर खर खर खर कै रथ दौरैं चह चह रहीं धुरी चिल्लाय ॥
दावति आवैं सब कनउज का भारी अंधकार गा छाय ३६
मस्ता हाथी घूमत आवैं छैला घोड़ नचावत जाँय ॥
रातौ दिन का धावा करिकै कनउज धुरा दबायनि आय ४०
को गति बरणै तेहि समया कै हमरे बून कही ना जाय ॥