सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 67

१४ आल्हाखण्ड । ६२
उमर तुम्हारी बहु थोरी है ताते धरा धीर ना जाय १४
जालिम राजा माड़ोवाला ऊदन मानो कही हमार ॥
धुआँ न दीख्यो तुम तोपनका नहिंरणनांगिदीख तलवार १५
पटा बनेठी बाना गदका सीखो रोज बनाफरराय ॥
जो जी चाहै सो तुम खावो कुश्ती लड़ो अखाड़े जाय १६
पै नहिं जावो तुम माड़ो को बेटा म्वरे उदयसिंहराय ॥
सुनिकै बातैं परिमालिक की बोला तुरत बनाफरराय १७
बरा बरस का क्षत्री लरिका रणमा गहै नहीं तलवार ॥
लालति त्यहिके फिरि जीवैका पैदा होवेका धिकार १८
बारह बरसके कृष्णचन्द्र रहें मथुरा कंस पछारयो जाय ॥
कालयमन औ जरासन्ध फिरि तिनपर कीन चढ़ाई आय १६
मोहरा मारा तिन दुष्टनका यह नित कहैं विप्र सब गाय ॥
मोहिं भरोसा शिरीकृष्ण का तिन बल लेउँ बापका दाँय २०
सुनिकै बातैं ये ऊदन की तब मन जानिलीन परिमाल ॥
कहा हमारो यहु मानी ना नाहर देशराज का लाल २१
यहै सोचिकै परिमालिक ने घोड़ा पांच लीन मँगवाय ॥
लीन कबुतरी को मलखाने बेंदुल लीन उदयसिंहराय २२
घोड़ करिलिया आल्हा लीन्ह्यो सिरगा बनरस का सरदार ॥
लीन गनोहर फिर घोड़े को यहु भीषम का राजकुमार २३
जूझक कङ्कण सवालाख का ऊदने हाथ दीन पहिराय ॥
आशिप दीन्ह्यो परिमालिक ने माड़ो लेउ बाप का दाँय २४
जितनी फौजैं म्वरे मोहबे मा सबियाँ बेगि लेउ सजवाय ॥
जावो माड़ो में पांचों मिलि मारो जाय करिंगाराय २५
सुनिकै बातैं परिमालिक की पांचों चलत भये शिरनाय ॥