आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ आल्हखण्ड । ६०८
मुण्डन केरे मुड़ धौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार २०
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥
कायर भागे समर भूमि ते अपने डारि डारि हथियार २३
भूरा सय्यद का मुर्चा भा दूनों लड़न लागि सरदार ॥
दूनों मारैं तलवारी सों दूनों लेयँ ढाल पर वार २४
उसरिन उसरिन दूनों खेलैं जैसे कुवाँ भरै पनिहारि ॥
वार चूकिया भूरा जबहीं सय्यद हना तुरत तलवारि २५
मूड़ बिसानी सो भूरा के तुरतै गिरा भरहराखाय ॥
भूरा जूझयो जब खेतन में आयो तुरत भुगन्ता धाय २६
सो ललकारयो फिरि सय्यदको अब रण सावधान है जाय ॥
धोखे भूरा के भूल्यो ना अबहीं यमपुर देउँ दिखाय २७
इतना कहिकै वीर भुगन्ता तुरतै लीन्ह्यो तीर चढ़ाय ॥
खैंचि कमानिया ते मारत भा सय्यद लैगे वार बचाय २८
घोड़ बढ़ायो फिरि सय्यद ने लैकै गुर्ज पहुंच्यो जाय ॥
वीर भुगन्ता को ललकारा क्षत्री खबरदार है जाय २६
वार हमारी ते बचि है ना दोजख अबै देउँ पहुँचाय ॥
इतना कहिकै क्रोधिन हैकै सय्यद मारयो गुर्ज घुमाय ३०
वार बचाई वीर भुगन्ता फिरित्यहिखैंचिली न तलवार ॥
ऐँचि कै मारा वीर भुगन्ता जूझयो बनरस का सरदार ३१
सय्यद जूझयो जब मुर्चा में तब चढ़ि अयो कनौजीराय ॥
गंगा ठाकुर तिन पाछे करि आगे गयो तड़ाकाधाय ३२
वीर भुगन्ता औ गंगा का परिगासमर बरोबरि आय ॥
लखै पिथौरा औ कनौजिया अद्भुतसमर कहा ना जाय ३३
आदिभयङ्कर पर पिरथी है लाखनि भूरी पर असवार ॥