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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 608

बेलासती अन्तमैदान । ६०७ ३
भारी लश्कर महराजाका गर्जत चला समरको जाय १०
थोड़े अरसा मा महराजा आये सरापास नगच्याय ॥
बाजै बाजा ह्याँ सती के हाहाकार शब्दगा छाय ११
बोला पिथौरा हाथी परते ओ महराज कनौजीराय ॥
बंश चँदेले के जो होवै सो सर देवै आगि लगाय १२
जायँ नगीचे नहिं ऊदन अब हैं अकुलीन बनाफरराय ॥
सुनिकै बातें पृथीराज की बोला तुरत लहुरवाभाय १३
हमै आज्ञा है बेला कै की सरदेवो आगिलगाय ॥
इतना कहिकै उदयसिंह ने दीन्ह्यो चितातुरतदँदकाय १४
यह गति दीख्यो पृथीराजने तुरतै हुक्म दीन फरमाय ॥
जान न पावैं मोहेबे वाले सब के देवो मूंड़ गिराय १५
हुकुम पायकै पृथीराज का चौंड़ा धाँधू उठे रिसाय ॥
बीर भुगन्ता गर्जन लाग्यो मारन लाग तड़ाका धाय १६
सय्यद देवा ऊदन ठाकुर इनहुन खैंचिलीन तलवार ॥
को गति वरणै त्यहि समया कै लागी होन भड़ामड़मार १७
हौदा हौदा यकमिल ह्वैगे घोड़न भिड़ी रानमें रान ॥
पहिया रथ के रथमा भिड़िगे तीरन भिड़िगे तीर्रकमान १८
मर मर मर मर ढालैं बोलैं खन खन तूण बाण चिल्लायँ ॥
सन् सन् सन् सन् गोली बरसें कायर भागैं समर पराय १६
घम् घम् घम् घम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय ॥
झलझलझलझलझीलम झलकैं नीलम रंग परै दिखराय २०
चम् चम् चम् चम् तेगा चमकैं दमकैं छुरी कटारी भाय ॥
कोगति वरणै त्यहि समया कै अद्भुत समर कहानाजाय २१
फिरैं भुशुण्डा बिन मुण्डा के रुण्डा करैं खूब तलवार ॥