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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 596

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
अथ आल्हखण्ड ॥
चन्दनखम्भाकायुद्धवर्णन ॥
सवैया ॥
सोहत मुण्डनमाल हिये अरु भाल में चन्द्र बिराजत नीके ।
शूल औ शक्ति कृपाण लिये डमरू कर सोहत शम्भुबलीके ॥
खातहैं भंग धरे शिरगंग सो नंग फिरैं अरधंग सतीके ।
जंग जुरे न टरैं ललिते हम ध्यावत चर्ण हैं शम्भु यतीके १
सुमिरन ॥
विपत्ति विदारण जगतारण के दूनों धरौं चरणपर माथ ॥
पूर मनोरथ तुम्हहीं करिहौ स्वामी दीनबन्धु रघुनाथ १
वल्कल धारे जटा सँवारे मारे बली बीर दशमाथ ॥
सो हैं स्वामी अवधपुरी के लीन्हे धनुषत्राण प्रभु हाथ २
अक्षत चन्दन औ पुष्पन सों मानस पूजन परम उदार ॥
सो मैं करिकै रघुनन्दन का जावा चहौं जगत के पार ३
तुम्हीं गोसइयाँ दीनबन्धहौ स्वामी र... ... ... ॥