आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्दनबागकेरमैदान। ५८६ ५
दुनिया जानति है ऊदन को जिनके लड़न क्यार बयपार ॥
दूसर धंधा कछु कीन्हे ना चौड़ा मानु कही यहि बार ३५
अटक पारलौं झंडा गड़िगा बाजी सेतबन्धलौं टाप ॥
दतिया बूंदी जालंधर औ हमरी भई कमायूँ थाप ३६
चन्दन जैहैं सब मोहबे को चाहे फौज देउ कटवाय ॥
रुकिहै चन्दन अब चौड़ाना तुमते साँच दीन बतलाय ३७
इतना सुनिकै जरा चौंड़िया तुरतै लीन्ह्यो गुर्ज उठाय ॥
ऐंचि कै मारा सो ऊदन के लैगा बेंदुल वार बचाय ३८
बचा डुलरूवा द्यावलिवाला हौदा ऊपर पहुँचाजाय ॥
कलश सूवरण हौदावाले सो धरती मा दीन गिराय ३६
झुके सिपाही दुहुँतरफा के लागी चलन तहाँ तलवार ॥
पैग पैग पै पैदल गिरिगे दुइ दुइ पैग गिरे असवार ४०
मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥
मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ४१
बिजयसिंह है बिकानेर को बिरसिंह गाँजर को सरदार ॥
दोऊ मारैं दोउ ललकारैं दोऊ समरधनी तलवार ४२
कोऊ हारै नहिं काहू सों दोउ रण परा बरोबरि आय ॥
दोऊ ठाकुर हैं हाथी पर दोऊ देयँ सेलके घाय ४३
वार चूकिगे बिरसिंह ठाकुर मारा विजयसिंह सरदार ॥
जूझिगे बिरसिंह समरभूमि में हिरसिंह आयगयोत्यहिबार ४४
सँभरो ठाकुर अब हौदापर कीन्ह्यो विजयसिंह ललकार ॥
सुनिकै बातें विजयसिंह की हिरसिंह खैंचिली नितलवार ४५
ऐंचिकै मारा विजयसिंह को सो तिन लीन ढालपर वार ॥
रिसहा ठाकुर बिकानेर को सोत्यहि मारा फेरि कटार ४६