आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ आल्हाखण्ड । ५८८
ऊदन बैठे रस बेंदुलपर मन में ध्याय शारदामाय ॥
सजे सिपाही सब ठाढ़े थे तुरतै कूच दीन करवाय २३
बाजत डंका अहतंका के यमुना पास पहुँचे जाय ॥
पार उतरिकै श्री यमुना के दिल्लीशहर गये नगच्याय २४
चन्दन बगिया जहँ पिरथीकी तहँ पर गये बनाफरराय ॥
चन्दन बढ़ई को बुलवायो चन्दन सबै दीन गिरवाय २५
तब तो माली हल्ला करिकै चलिभे जहां पिथौराराय ॥
लगी कचहरी महराजा की शोभा कही बून ना जाय २६
ठाढ़े माली तहँ बिनवत हैं दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
ऊदन आये हैं मोहवे ते चन्दनबाग डरी कटवाय २७
कहा न माना क्यहु मालीका ओ महराज पिथौराराय ॥
सुनिकै बातें ये माली की चौंड़ा धाँधू लीन बुलाय २८
कहि समुझावा तिन दूननते यहु महराज पिथौराराय ॥
जितने आये हैं बगिया में सबकी कटा देउ करवाय २६
इतना सुनिकै चौंड़ा धाँधू दूनों लीन फौज सजवाय ॥
चढ़ि इकवन्ता भौंरानँदपर दूनों कूच दीन करवाय ३०
भारीलश्कर इत लाखनि का उत यहु गयो चौंड़ियाआय ॥
चन्दन छकड़ा चौंड़ा घेरे औ यह बोला भुजा उठाय ३१
कौन बहादुर है मोहवे मा चन्दनबाग लीन कटवाय ॥
हुकुम पिथौरा का नाहीं है लकड़ी एक यहाँ से जाय ३२
सुनिकै बातें ये चौंड़ा की सम्मुख गये बनाफरराय ॥
हमीं बहादुर हैं मोहवे के चन्दनबाग लीन कटवाय ३३
मोहिं ठकुरानी बेला रानी मोहवे वाली दीन पठाय ॥
सच्ची ह्वैहै लै ब्रह्मा को चौंड़ा साँच दीन बतलाय ३४