आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ आल्हखण्ड । ५६०
लागि कटारी गै हिरसिंह के सोऊ जूझिगयो त्यहिवार ॥
हिरसिंह विरसिंह गाँजरवाले दोऊ जूझिगये सरदार ४७
तब महराजा कनउज वाला लाखनिराना कहा पुकार ॥
गंगा मामा कुड़हरिवाले मारो विजयसिंह यहिवार ४८
इतना सुनिकै गंगाठाकुर अपनो हाथी दीन बढ़ाय ॥
विजयसिंह को फिरिललकारा ठाकुर कूच जाउ करवाय ४९
नहीं तो बचिहौ ना हौदापर जो विधि आपु बचावै आय ॥
इतना सुनिकै विजयसिंह ने अपनो हाथी दीन बढ़ाय ५०
विजयसिंह औ फिरि गंगाका परिगा समर बरोबरि आय ॥
सेल चलाई विजयसिंह ने गंगा लैगे वार बचाय ५१
ऐंचिकै भाला गंगा मारा त्यहिके गई प्राणपर आय ॥
जूझिग राजा विकानेर का गंगा बढ़ा तड़ाका धाय ५२
हीरामणि चरखारी वाला सोऊ गयो तहॉपर आय ॥
त्यहिललकारा फिरि गंगाको ठाकुर खबरदार ह्वैजाय ५३
वार हमारी ते बचिहै ना जो विधि आपु बचावै आय ॥
त्यहिते तुमका समुझाइत है ठाकुर कूच जाउ करवाय ५४
इतना कहिकै हीरामणि ने मारी खैंचि तुरत तलवार ॥
बचिगा ठाकुर कुड़हरि वाला लीन्हेसिआड़ि ढालपरवार ५५
बोला ठाकुर चरखारी का ठाकुर धन्य तोर अवतार ॥
मैं हनि मारा दुहुँ हाथ ते पै तुम लीन ढालपर वार ५६
सुनिकै बातें हीरामणि की गंगा लीन तुरत तलवार ॥
ऐंचिकै मारा हीरामणि के सो पै जूझिगयोत्यहिवार ५७
स्याबासि स्याबासि गंगा मामा लाखनि कहा बचन् ललकार ॥
तुम्हारी समता का क्षत्री ना अब कोउ देखिपरे यहिवार ५८