आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ आल्हाखण्ड । ४६६
लाखनिराना मीरा सय्यद धतुवाँ सहित उतरिगे पार ॥
नौसै हाथी लखराना का सातसै हथी पिथौरा क्यार २२
सोलासै के हाथी दलमा पहुँचे तुरत कनौजीराय ॥
जितने हाथी दूनों दल के सोसब तुरतलीन खिदवाय २३
गा हरिकारा पृथीराज का चौंड़ै खबरि जनाई जाय ॥
हमरी अपनी सब हथिनिनको लाखनिराना लीनखिदाय २४
सुनिकै बातैं हरिकारा की चौंडा फौज लीन सजवाय ॥
धाँधूठाकुर को सँग लैके तुरतैं कूचदीन करवाय २५
बीस खेत जब लाखनि रहिगे चौंड़ा बोला वचन सुनाय ॥
कहाँते आयो औ कहँ जैहौ आपन हाल देउ बतलाय २६
इकलो हाथी लखि चौंड़ाको लाखनि भूरी दीन बढ़ाय ॥
सम्मुख आये जब चौंड़ा के बोले तबै कनौजीराय २७
बेन चकवै के नाती हम बेटा रतीभान को जान ॥
मोहबा देखन हम जाइत हैं लाखनि नाम हमारो मान २८
आल्हा ऊदन के सँग आयन चौंड़ा साँच दीन बतलाय ॥
इतना सुनतै चौंड़ा बोला मानो कही चँदेलेराय २६
आल्हा चाकर परिमालिक के सो कनउजको गये रिसाय ॥
कीनि चाकरी उन जयचँदकी तिनके साथ कनौजीराय ३०
ऐसी कहिये नहिं काहू सों अबहीं कूच देउ करवाय ॥
संगति राजा अरु चाकर की कतहूँ न सुनाकनौजीराय ३१
इतना सुनिकै लाखनि बोले मानो कही चौंड़ियाराय ॥
बड़ी बड़ाई ऊदन कीन्ही तब मनगई लालसा आय ३२
बिना मोहोबा आँखिन दीखे कैसे कूच देयं करवाय ॥
इतना सुनिकै चौंड़ा बोला मानो साँच कनौजीराय ३३