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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 436

कीरतिसागरका मैदान । ४३५ ११
योग दिखावब हम सागर पर खेतम लड़ब बरोबरि आय ॥
देखि सनीनो हम मोहबे का पाछे धरब अगाड़ी पायँ १०५
पंद्रादिन लौं रहि मोहवे मा तुम्हरी परब देब करवाय ॥
नहिं मुख देखें हम पिरथी का गड़बड़ तहाँ मचावैं आय १०६
अड़वड़ योगी हमरे सँग मा लड़बड़ गड़बड़ देयँ हटाय ॥
बड़बड़ राजनकी गिनती ना सड़वड़ करें हमारी आय १०७
काह हकीकति है पिरथी कै जो तहँ चेंय करें मुख माय ॥
मान न रैहैं तहँ काहू के योगी योग देयँ दिखलाय १०८
काल्हि सबेरे तुम सागर मा पवनी करो अपनी जाय ॥
दूत पठावो तुम झाबर का योगी फौज देयँ दिखलाय १०६
मारि गिरावैं हम भोगिन का माता साँच दीन बतलाय ॥
भयो आसरा तब मल्हना के योगी चलिभे शीश नवाय ११०
सुनी बतकही यह माहिल जब टाहिल चुगुलन मा सरदार ॥
चला उताइल सो सागर को राजा पिरथी के दरबार १११
बड़ी खातिरी करि माहिल कै राजा पास लीन बैठाय ॥
कही हकीकति तहँ योगिन कै माहिल बार बार सब गाय ११२
योगी आये अनगिनती हैं झाबर डेरा दिह्यनि डराय ॥
शपथ खायकै ते मल्हना ते अबहीं गये पिथौराराय ११३
मारि गिरावब हम सागर मा गड़बड़ जौन मचाई आय ॥
काह हकीकति पृथ्वीराज कै आपनयोग देब दिखलाय ११४
साँचे योगी सो अड़बड़ हैं हमहूँ देखि गयेन सकुचाय ॥
पहिले खेदो तुम योगिनका पाछे मोहबा लेउ लुटाय ११५
काह हकीकति है योगिन कै सरबीर करें नृपति कै आय ॥
चौंड़ा धांधू को पठवावो योगी कूच देयँ करवाय ११६