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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 404

गाँजरकीलड़ाई । ४०३ १३
मुर्च्छित हैगा सातनि राजा तुरतै कैदलीन करवाय ॥
बांधिकै मुशकें महराजा की कनउजतुरतदीनपहुँचाय १३०
जोगा भोगा दोउ मारेगे जखमी भयो पपीहा आय ॥
इतना शोचत उदयसिंह के मनमागयोक्रोधअतिछाय१३१
माल खजाना सब सातनि का ऊदन तुरत लीन लुटवाय ॥
कूच करायो फिरि पट्टी ते पहुँचे देश कामरू जाय १३२
गड़िगे तम्बू तहँ आल्हा के सब रंग ध्वजा रहे फहराय ॥
चला कामरू का हरिकारा राजै खबरि सुनाई जाय १३३
फौजै आई क्यहु राजा की डाँड़े भीर भार अधिकाय ॥
इतना सुनिकै कमलापति ने गुप्ती धावन दीन पठाय १३४
खबरिलायकै सो फौजन की राजै फेरि सुनावाआय ॥
सुनिकै बातें त्यहि धावन की डंका तुरत दीन बजवाय १३५
हाथी सजिगा कमलापति का तापर आपभयो असवार ॥
झीलमबखतरपहिरी सिपाहिन हाथ म लई ढालतलवार १३६
यक यक भाला दुइ दुइ बल्छी कोंताखानी लीन कटार ॥
हथीचढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न पर असवार १३७
बाजी तुरही तहँ सुरही सब पुप्पूं पुप्पूं परै सुनाय ॥
बाजे डङ्का अहतङ्का के राजा कूचदीन करवाय १३८
आयकै पहुँच्यो जब डाँड़े पर गरुई हाँकदीन ललकार ॥
को चढ़िआवा है डाँड़े पर सम्मुख जवाबदेय सरदार १३६
पाछे फौजै ऊदन करिकै आगे घोड़ नचावाजाय ॥
गरुई हाँकनते बोलत भा यहु रणबाधु बनाफरराय १४०
तुमपर चढ़िकै लाखनि आये पैसा आपदेउ मँगवाय ॥
कुमक म आये आल्हा ठाकुर ऊदननाम हमारो आय १४१