सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 343, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 343

२४ आल्हखण्ड । ३४०
धर्म न छाँड़्यो भीमसेन ने बनमाँ रह्यो मूलफलखाय ९७
किह्यो दुर्दशा दुर्योधन ने योधन भीमसेन अधिकाय ॥
हुकुम युधिष्ठिर का पायो ना आयो धन बल सबै गवाँय ९८
अब बतलाओ तुम इन्दल को पायो खोज कहाँपर भाय ॥
इतना सुनिकै बघऊदन ने सबियाँ कथा दीन बतलाय ९९
मलखे बोले फिरि ऊदन ते दशहरिपुरै चलो तुम भाय ॥
ऊदन बोले मलखाने ते दादा साँच देयँ बतलाय १००
हमहूँ मकरँद नरवर जैबै इन्दल जावो आप लिवाय ॥
कसम जो खाई चितरेखा ते करिबेब्याह तुम्हारो आय १०१
कहि समुझायो तुम दादा ते नरवर मिली उदयसिंहराय ॥
इतना सुनिकै इन्दल बोले चाचा सुनो बनाफरराय १०२
तुम ना जैहौ दशहरिपुर को तौ इन्दल कै जाय बलाय ॥
कौन बुलाई घर इन्दल का जैवो वच्छ तड़ाका आय १०३
सुनिकै बातें बघइन्दल की ऊदन कहा बहुत समुझाय ॥
मलखे दादा के सँग जावो नरवर मिलवतुम्हैं हम आय १०४
इतना कहिकै बघऊदन ने तहँ ते कूच दीन करवाय ॥
मकरँद ऊदन सिरसागढ़ ते नरवर गढ़ै पहुंचे जाय १०५
मलखे देवा इन्दल ठाकुर इनहून कूच दीन करवाय ॥
लागि कचहरी परिमालिक कै तीनों तहां पहुंचे आय १०६
राजा दीख्यो जब इन्दल को तब मन खुशी भयो अधिकाय ॥
मलखे बोले तब राजा ते दोऊ हाथ जोरि शिर नाय १०७
सवैया ॥
आज जो काज कियो बघऊदन लाजरही औ बढ़ी प्रभुताई ।
राजन आपके पुण्य प्रकाशते भासरही जग में ठकुराई ॥