आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 268, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ें[Header]
उदयसिंहका विवाह । २६५ २७
[Body]
भये अयाचक सब याचकगण जयजयकार रहे तहँगाय १३३
कूच के डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान ॥
बैठे हाथी आल्हा ठाकुर करिकै रामचन्द्रको ध्यान १३४
मलखे सुलखे देवा ब्रह्मा मन्नागूजर भयो तयार ॥
औरो राजा न्योते आये तिनहुन बाँधिलीन हथियार १३५
हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िंगे बाँके घोड़न भे असवार ॥
कूच कराय दयो मोहबेते चलिभे सबै शूर सरदार १३६
खर खर खर खर कै रथ दौरे चह चह धुरी रहीं चिल्लाय ॥
चलिभैं फौज दल बादल सों शोभाकही बूत ना जाय १३७
झम्झम्झम्झम् झीलमबोलैं मर्मर होयँ गैंड़की ढाल ॥
मारु मारु कै मौहरि बाजैं बाजैं हाव हाव करनाल १३८
छाय अँधेरिया गै मारग में छिपिगे अन्धकार सों भान ॥
को गति बरौ शहजाद्यन कै एकते एक रूप गुणखान १३६
तेगा लीन्हे बर्दवान के कोता खानी लिहे कटार ॥
यक यक भाला दुइ दुइ बरछी कम्मर परी एक तलवार १४०
आठरोज का धावा करिकै नरवर पास गये नगच्याय ॥
पांचकोस जब नरवर रहिगा मलखे डेरा दीन डराय १४१
ऊंची टिकुरिन तम्बू गड़िगे नीचे लागीं खूब बजार ॥
हौदा उतरे तहँ हाथिन के क्षत्रिन छोरिधरा हथियार १४२
जहँना तम्बूहै आल्हा का तहँना लाग खूब दरबार ॥
चूड़ामणि पण्डित तहँ बैठे साइतिलागे करनविचार १४३
ऐपनवारी की साइति है पण्डित कहा सुनो मलखान ॥
मलखे बोले तब रुपना ते हमरे करो बचन परमान १४४
ऐपनवारी बारी लैके नरपति द्वार देउ पहुँचाय ॥