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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 238

ब्रह्माका विवाह । २३५ १६
लालति तुम्हरे मन चब्बन को तुमका बार बार धिक्कार ८०
त्यही समैया ऊदन चलिभा सबसों बिदा मांगि त्यहिबार ॥
चढ़ा पालकी ब्रह्मा ठाकुर ऊदन बेदुल भा असवार ८१
आयकै पहुंचे दूउ लश्कर में जहाँ दरबार चँदेले क्यार ॥
हाथ पकरिकै ब्रह्मा ऊदन तम्बुन गये दोऊ सरदार ८२
चरणन परिकै परिमालिक के बैठे दूऊ बीर बलवान ॥
पूंछन लागे बघऊदन ते तुरतै तहाँ बीर मलखान ८३
कहौ हकीकति सब महलनकी कैसी भई रीति ब्यवहार ॥
सुनिकै बातें मलखाने की कहिगा यथातथ्य सरदार ८४
सुनिकै बातें बघऊदन की आल्हा ठाकुर लीन बुलाय ॥
कमर बिलोकै बघऊदन की कैसा परा कटारी घाय ८५
चिह्न न पायो कहूं घाव को आल्हा बोल्यो बचनसुनाय ॥
झूठ न बोलत तुम ऊदन रहौ कैसी किह्यो दिल्लगी भाय ८६
ब्रह्मा बोले तब आल्हा ते दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
साँची दादा ऊदन बोल्यो झूठ न कह्यो लहुरवाभाय ८७
लीन्हे बूटी रानी आई सो ऊदन के दिह्यो लगाय ॥
घाव पूरिगा बघऊदन का औ उठि बैठ लहुरवा भाय ८८
सुनिकै बातें ब्रह्मानँद की गे परिमाल सनाकाखाय ॥
कूच कराओ अब लश्कर को बोला फेरि चँदेलाराय ८९
बातें सुनिकै महराजा की मलखे रुपना लीन बुलाय ॥
औ समझायो यह रुपना को यह तुम कहौ पिथौ रैजाय ९०
कह्यो सँदेशा परिमालिक है बेटी बिदा देयँ करवाय ॥
इतना सुनिकै रुपना चलिभा औफिरि अटा द्वारपरजाय ९१
द्वारे ठाढे पिरथी राजा तिनसों बोला शीश नवाय ॥