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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 230

ब्रह्माका विवाह । २२५ २६'
ऐसी बातें जो फिरि बोलै तौ मुहँ धाँसिदेउँ तलवार १६५
बातैं सुनिकै कमलापति की भैने जौनु चँदेले क्यार ॥
ऐँड़ लगायो हरनागर के हाथी उपर गयो सरदार १६६
भाला मार्यो कमलापति के तोंदी परा घाव सो जाय ॥
द्वार जूझिगा कमलापति जब रहिमतसहिमतचलेरिसाय१६७
ऊदन बोले तब देवा ते ठाकुर मैनपुरी चौहान ॥
देखो आवत दुइ लड़ने को उतसों समर भूमिमें ज्वान १६८
मन्नागूजर को सँग लै कै मारो समर भूमि मैदान ॥
तुम्हरी दूनन की बरणी है मानो कही बीर चौहान १६६
सुनिकै बातें बघऊदन की दोऊ बढ़े अगाड़ी ज्वान ॥
रहिमत सहिमतको ललकार्यो होवो खड़े समर मैदान १७०
सुनिकै बातें इन दोउन की उनहुन खैंचि लीन तलवार ॥
उसरिन उसरिन दोऊ मारैं दोऊ लेयँ ढालपर वार १७१
बड़ी लड़ाई भै द्वारेपर औ बहि चली रक्तकी धार ॥
रहिमत सहिमत जिन्सीवाले घायल भये द्वऊ सरदार १७२
सुमिरि भवानी महिरवाली मनियादेव मोहेबे क्यार ॥
घोड़ बढ़ायो बघऊदन ने दोऊ कलशा लिये उतार १७३
देखि वीरता बघऊदन की भा मन खुशी पिथौराराय ॥
हँसिकै बोल्यो बघऊदन ते मानो कही बनाफरराय १७४
उलटी रीती हमरे घरकी ऐसो सदा क्यार व्यवहार ॥
हो समधवारो जब द्वारेपर तबफिरिभौरिनकाव्यवहार१७५
अब तुम लावो परिमालिक को यहहू नेग यहाँ द्वैजाय ॥
होय तयारी फिरि भौरिनकै साँचे हाल दीन बतलाय १७६
इतना सुनिकै ऊदन चलिभो पहुँचा जहाँ रजापरिमाल ॥
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