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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 228

ब्रह्माका विवाह । २२३ २६
आतशबाजी की शोभा अति भाला तारा के अनुमान १--
कउँधालपकनि खड्गचमकनि हूकनि गुड़गुड़दीन मचाय ॥
पैग पैग पर दूनों चलि चलि रुकिरुकिपैगपैगपर जायँ १४२
को गति बरणै महराजन कै मानो देव भूमिगे आय ॥
दो बिचवानी दउ दिशि घूमें रुकिरुकिपैगपैगपर जायँ १४३
उठै सुगन्धैं तहँ अतरन की बेला और चमेला हार ॥
का गति बरणों मैं निवारि की क्षत्री किये फूल श्रृंगार १४४
नीली पीली जंगाली औ लाली पगड़िनकेरि कतार ॥
मुँदरी छल्ला मोहनमाला क्यहुगरपरामोतिनकाहार १४५
देखें तमाशा जे नारी नर तिनका लागै नीकि बहार ॥
शाल दुशाले नीले पीले चमकैं इन्द्रधनुष अनुहार १४६
बाल सूर्य्यसम मूंगा चमकैं दमकैं तहाँ जवाहरलाल ॥
जब अगवानी पूरण हैगै गावन लगीं द्वारपरबाल १४७
संगम हैगा दुहुँ तरफा ते दूनों तरफ भये सतकार ॥
दूनों मिलिकै संगम हैकै पहुँचे पृथीराज के द्वार १४८
जौरा भौंरा हाथी ठाढ़े ताहर बोले बचन पुकार ॥
जौन शूरमा हों मोहबे के द्वारे हाथी देयँ पछार १४६
सुनिकै बातें ये ताहर की चलिभा उदयसिंह झन्नाय ॥
जावत देख्यो उदयसिंह को मलख्यो चला तुरत ठन्नाय १५०
को गति बरणै दोउ बीरन की मानो चले कृष्ण बलराम ॥
ऊदन सुमिरयो श्रीशारद को मलखेलीनशिवाशिवनाम १५१
ऊदन चलिभा जौरा दिशिको मलखे भौंरा की दिशिजाय ॥
पूँछ पकरिकै तिन हाथिन कै जैसे सिंह घसीटै गाय १५२
तैसे ऊदन मलखे ठाकुर दोऊ नाग घसीटैं धाय ॥