आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४ आल्हखण्ड । १६०
पकरिकै बाहू दउ ऊदन की मलखे छाती लीन लगाय ॥
तीनों चलिभे फिरि खन्दकसों आल्हा निकट पहुँचे आय ४५
राजा बोल्यो फिरि आल्हा सों मानो कही बनाफराय ॥
कैदी छोड़ो दउ पुत्रन को अबहीं ब्याह लेउ करवाय ४६
ऊदन बोले फिरि राजाते तुम्हरी कौन 'करै परतीति ॥
गंगा करिकै दादै लैके घरमाँ किह्योजाय अनरीति ४७
दया आयगे फिरि आल्हाके गंगा फेरि लीन करवाय ॥
कैद छुड़ायो दउ पुत्रन को पण्डित तुरतै लीन बुलाय ४८
देखिपत्तरा पण्डित बोल्यो भाँवरि आजु लेउ करवाय ॥
इतना सुनिकै राजा चलिभा दोऊ पुत्रन साथ लिवाय ४६
आल्हा पहुंचे जनवासे में राजा महल पहुँचा जाय ॥
लिल्ली घोड़ी माहिल चढ़िकै राजा घरै गये फिरि धाय ५०
बड़ी खातिरी राजा कीन्ह्यो माहिल बैठि महल में जाय ॥
माहिल बोले फिरि राजाते मानो कही बिसेनेराय ५१
जितने ठाकुर आल्हा घरके मड़येतरे लेउ बुलवाय ॥
शूर कुठरियन में बैठारो सबके मूड़लेउ कटवाय ५२
इतना कहिकै माहिल चलिभे पथरीगढ़ै पहुँचे आय ॥
किह्यो तयारी ह्याँ मड़ये की यहु गजराजा खंभ गड़ाय ५३
सूरज बेटा को बुलवायो तासों कह्यो हाल समुझाय ॥
सुनिकै बातैं सब राजा की सूरज चलिभा शीशनवाय ५४
जायकै पहुँच्यो जनवासे में जहाँ पर बैठि बनाफरराय ॥
कह्यो हकीकति सबआल्हासों सूरज बार बार शिरनाय ५५
सुनिकै बातें सब सूरज की आल्हा हुकुम दीन फर्माय ॥
आवै घोरैया सब मड़ये को यहु कहिदियो बिसेनेराय ५६