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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 196

मलखानका बिवाह । १६१ ३५
इतना सुनिके ऊदन देवा जोगा भोगा भये तयार ॥
मलखे सुलखे ब्रह्मा लाखनि इनहुन वांधिलीन हथियार ५७
चन्दनबेटा पृथ्वीराज को जगनिक भैने चँदेलो क्यार ॥
मोहनबेटा बीरशाह को बौरीगढ़ को जो सरदार ५८
हाथी सजिगा पचशब्दाफिरि आल्हा तापर भये सवार ॥
बारहु ठाकुर अपने अपने सबहिन बाँधिलियेहथियार ५६
कूच करायो जनवासे ते मड़ये तरे पहुंचे जाय ॥
चन्दन चौकी मलखे बैठे पण्डित साइति दियो बताय ६०
घर औ कन्या इकठौरी भे भाँवरिसमय गयो नगच्याय ॥
पहिली भाँवरि के परतैखन सूरज ठाकुर उठा रिसाय ६१
वार चलाई सो मलखे पर ऊदन लीन्हो वार बचाय ॥
दूसरि भाँवरि के परतैखन कांतामलहू गयो रिसाय ६२
खैंचिकै मारा सो मलखेपर रोंका तुरत लहुरवाभाय ॥
तीसरि भाँवरि के परतैखन सबियाँ शूर पहुँचे आय ६३
बड़ी लड़ाई भै आँगन में तुरतै बही रकतकी धार ॥
मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लाग पहार ६४
आधे आँगन भौंरी होवैं आधे खूब चलै तलवार ॥
नाई बारी जी लैभागे जूझे बड़े बड़े सरदार ६५
को गति बरणै राजपूतन कै भारी हाँक देयँ ललकार ॥
चलै कटारी बूंदी वाली आँगन चमकिरही तलवार ६६
चन्दन मोहन लाखनि ऊदन दोऊ हाथ करैं तलवार ॥
को गति बरणै जगनायक कै भैने जौन चँदेले क्यार ६७
जोगा भोगा सुलखे देवा इनहुन खूब मचाई मार ॥
इतने क्षत्रिन के मारुन में कोउ न खड़ा होय सरदार ६८