आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ आल्हखण्ड।
देखन केरी अभिलाषा जो ओ महराज कनौजीराय ४
बूढ़े बाम्हन की बातें सुनि लीन्ह्यो चन्दभाट बुलवाय ॥
औसमुझायो फिरित्यहिकोसब यहु रणबाधु चँदेलोराय ५
सुनिकै बातें चंदेले की चलिभो चन्दभाट शिरनाय ॥
चढ़िकै घोड़ाकी पीठौमाँ दिल्ली शहर पहुंचा जाय ६
जायकै पहुँच्च्यो त्यहिफाटकमाँ जहँ दरबार पिथौरा क्यार ॥
दीख पौरिया चन्दभाट को गरुई हांक दीन ललकार ७
हुकुम दर्रो हुकुम दर्रो साहेबजादे बात बनाव ॥
कहाँते आयो औ कहँ जैहौ जल्दी आपन नाम बताव ८
सुनिकै बातें दरवानी की बोल्यो चन्दभाट ततकाल ॥
देश हमारो कनउज जानो जावैं जहाँ बैठ नरपाल ६
मोहिं पठायो जयचंद राजा हमरो चन्दभाट है नाँउ ॥
खवरि जनावो पृथुइराज को ओ दरवानी बात बनाउ १०
सुनिकै बातें चन्दभाट की सो दर्बार पहुंचा जाय ॥
हाथ जोरिकै दोउ बोलतभा औ चरणनमें शीशनवाय ११
चन्दभाट कनउज ते आयो ओ महराज पिथौराराय ॥
हुकुम जो पावैं महराजा को तो मैं लावों साथ लिवाय १२
सुनिकै बातें दरवानी की बोले पृथीराज महराज ॥
लावो लावो त्यहि जल्दी सों आयोचन्दभाटक्यहिकाज १३
सुनिकै बातें महराजा की दौरत चला पौरिया जाय ॥
सँग माँ लैके चन्दभाट को औ दर्बार पहुंचा आय १४
चन्दभाट तब लखि पिरथी का दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥
कह्यो सँदेशा चन्देला जो सो पिरथीका दियो सुनाय १५
सुनि संदेशा चन्देले का भा मन खुशी पिथौराराय ॥