आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंयोगिनिस्वयम्बर । १५
साल दुसाला दिह्यो भाट को गल माँ हार दीन पहिराय १६
आगे पठयो चन्द भाट को पाछे हिरसिंह लियो बुलाय ॥
चन्द कबीश्वर को बुलवायो तासों कह्यो हाल समुझाय १७
बाना बदल्यो पृथुइराज ने मन माँ श्रीगणेशको ध्याय ॥
सुमिरि भवानी शिवशङ्कर को औ सुर्यन को माथनवाय १८
तीनों चलिभे फिरि दिल्लीसों सीता राम चरण मन लाय ॥
आठ रोज को धावा करिकै कनउज धुरादबाइनिआय १९
त्यही समइया त्यहि अवसर माँ राजा कन उज का सरदार ॥
मन्त्री बैठरहे बायें माँ तासों बोल्यो बचन उदार २०
एक मना सोना को लै कै औ कारीगर लेव बुलाय ॥
मूरति रचिकै दरवानी की सो द्वारे पर देव धराय २१
सुनिकै बातें महराजा की मन्त्री तुरत उठा शिरनाय ॥
मूरति पौरिया की बनवायी औ द्वारे पर दियो रखाय २२
त्यही समइया त्यहि अवसरमाँ पहुँचा चन्दभाट फिरिआय ॥
खबरि सुनायो सब दिल्ली की औ चरणनमें शीशनवाय २३
हिरसिंह ठाकुर चन्द कबीश्वर तिनके साथ पिथौराराय ॥
तीनों मिलिकै त्यहि पाछे सों औ दरबार पहुंचे आय २४
दीख सिंहासनपर जयचँदको भारी तहां दीख दरबार ॥
बैठै क्षत्री अरूझ्वारा सों एक सों एक शूर सरदार २५
दयर मुकदिमा बहु खूनी हैं बहुतक ठाढ़े तहां वकील ॥
अऊ जेहल को पहुँचायेगे काहुकि दीन हथकड़ी ढील २६
त्यही समइया त्यहिअवसर माँ आगे चन्दकवीश्वर जाय ॥
बहु पद गायो सभा मध्य में आपन दीन्ह्यो नाम बताय २७
कह्यो सँदेशा पृथुइराज ने ओ महराज कनौजीराय ॥