सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 18, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 18

संयोगिनिस्वयंम्बर । १३
नित प्रति पाठ होयँ दुर्गाके औ तहँ करैं यती नित बास ॥
विधिसों पूजन जोकोउ कीन्ह्यो पूरणभई तासु की आस २
आगे दरखत है नींबी का बायें पीलूका अधिकार ॥
बरगद पीपर गूलर दहिने जिनकीशोभा अमितअपार ३
प्रातःकाल नारि सब जावैं ध्यावैं देवी चरण मन लाय ॥
सायंकाल पुरुष सब जावैं गावैं वेद ऋचन को जाय ४
पिता हमारे किंरपाशङ्कर तहँपर पाठकीन बहुकाल ॥
फिरिम्बेहिं सौंप्यो तिनदेवीका मानो सत्य सत्य सब हाल ५
तेरह बरसें हमका गुजरीं चाकरभये नवल दरबार ॥
छुट्टी लैकै नवरात्रन में जावैं अवशि महीना कार ६
पाठ सुनावैं श्री दुर्गा की बालेश्वरी शरण में जाय ॥
जो कुछ मनमें हमरे होवै सो अभिलाष पूरी है जाय ७
प्रथम भागवत तहँपर बाँची साँची कथा कहाँ सब गाय ॥
रुक्यो न काहू पदमें तहँ पर देवी कृपामई अधिकाय ८
छूटि सुमिरनी गै देवी कै सुनिये जयचँद क्यारहँवाल॥
चन्दभाट दिल्लीको जाई आई दिल्लीका नरपाल ६
अथ कथाप्रसंग ॥
भोर भ्वरहरे पह फाटत खने सोयकै उठा कनौजीराय ॥
प्रातक्रिया करि सब जलदी सों फिरि दरबार पहुंचा आय १
बैठ्यो राजा सिंहासन पर भारी लागि गयो दरबार ॥
किह्यो पैलगी सब बिप्रनको क्षत्रिन कीन्ह्यो राम जुहार २
बूढ़ बिप्रसों फिरि बोलतभा दिल्ली कौन पठावा जाय ॥
सुनिकै बातें चन्देले की बोल्यो बिप्र बचन हर्षाय ३
चन्दभाटको तुम पठवो अब सो पिरथीका लवै बुलाय ॥