आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ आल्हखण्ड । १७८
हाल बिसेने जो सुनि पावैं तो यहि डरैं जानसों मार ८५
हल्ला करिकै यह बोलतभै तब हम कहा याहि समुझाय ॥
धीरे बोलै जनवासे में नहिं कहुँ सुनी बिसेनोराय ८६
इतना सुनतै मुहँ मटकायो गारी दियो बनाफरराय ॥
ढोलक नारिन औ शूदन की तुमसों कथा कहौं मैं गाय ८७
जैसे पीटे ढोलक बाजै नारी दशा स्वई है भाय ॥
गगरीदाना शूद उताना यहहू मिला खूब ह्याँ आय ८८
भला तुम्हारो हम नित चाहैं साँची सुनो बनाफरराय ॥
जैसे मैने म्वर ब्रह्मा हैं तैसे तुम्हूँ लहुरवा भाय ८६
घाटि न जानैं हम ब्रह्मा ते कैसी कहौ उदयसिंहराय ॥
इतना सुनिकै ऊदन चलिभे सँगमेंमालिनिलीन लिवाय ६०
जहाँ पर बैठे थे आल्हाजी ऊदन तहाँ पहुँचे जाय ॥
कही हकीकति तहँ मालिनिने ऊदन पाती दीन सुनाय ६१
बड़ा शोचभा सुनि आल्हाके मनमें वार वार पछितायँ ॥
हमहीं पठवा था मलखे को तबचलिगयो लहुरवाभाय ६२
दिह्यो अशर्फी बहु मालिनिको कीन्ह्यो बिदा बनाफरराय ॥
मालिनि चलिभै जनवासेते पहुँची फेरि महलमें जाय ६३
कह्योहकीकति गजमोतिनिते ऊदन बोले शीश नवाय ॥
हुकुम जो पावैं हम दादा को तौ मलखे को लवैं छुड़ाय ६४
बातैं सुनिकै ये ऊदन की आल्हा हुकुम दीन फर्माय ॥
हुकुम लगायो फिरि ऊदन ने डङ्का तुरत दीन बजवाय ६५
बाजे डङ्का अहतङ्का के सबियाँ फौज भई तय्यार ॥
हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ६६
पहिल नगाड़ा में जिनबंदी दुसरे बांधि लीन हथियार ॥