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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 182

[Header] मलखानका बिवाह । १७७ २१

डोला जाई जब मोहवे को तुमको द्रव्य देउँ अधिकाय ७३
इतना सुनिकै मालिनि चलिभै फाटक ऊपर पहुँची आय ॥
सूरज बेटा गजराजा को द्वारे ठाढ़रहै सो भाय ७४
सो हँसि बोला तहँ मालिनि सों मालिनि कहाँ चली तू धाय ॥
मालिनि बोली तहँ सूरज सों बेटा फूल लेन को जायँ ७५
मोहिं पठायो गजमोतिनि है तुम सों सत्य दीन बतलाय ॥
सूरज बोला दरवानिन सों याकी लेउ तलाशी भाय ७६
सुनिकै बातें ये सूरज की नंगाझोरी लीन कराय ॥
चिट्ठी खोंसे सो जूरा में ताको पता मिला नहिं भाय ७७
मालिनि चलिभै फिरि आगेको फौजन पास पहुँची जाय ॥
जहँ जनवासा था आल्हा का मालिनिअटी तहांपर आय ७८
मालिनि पूछ्यो तहँ माहिलसों कहँ पर बैठ उदयसिंहराय ॥
माहिल पूछ्यो तहँ मालिनिसों आपन हाल देय बतलाय ७९
नाम हमारो उदयसिंह है आई कौन काज तू धाय ॥
सुनिकै बातें ये माहिल की मालिनि कथागई सबगाय ८०
सुनिकै बातें सब मालिनिकी माहिल चाबुक लीन उठाय ॥
पीटन लाग्यो सो मालिनिको औ यह कह्योबचनसमुझाय ८१
जल्दी जावै घर अपने को अब ना कहे कथा अस गाय ॥
बड़े जोर सों मालिनि रोई पहुँचा उदयसिंह तब आय ८२
पूछी हकीकति उदयसिंह तब मालिनि कथागई फिरिगाय ॥
मोहिं पठायो गजमोतिनिहै चिट्ठी हाथ दीन पकराय ८३
पढ़तै चिट्ठी बघऊदन के आँखन बही आँसुकी धार ॥
डाटन लाग्यो फिरि माहिलको का तुम कीनवहौ अपकार ८४
सुनिकै बातें बघऊदन की बोला उरई का सरदार ॥
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