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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 165

४ आल्हखण्ड । १६०
ब्याह बिसेने के करिवे ना टीका तुरत दीन लौटाय ॥
सूरज चलिभे तहँ दिल्ली ते • कनउज फेरि पहुंचे आय २२
हैं कनौजिया जहाँ बाम्हन बहु बड़ बड़ महल परैं दिखराय ॥
वेद पुराणन की चर्चा तहँ घरघरअधिक२ अधिकाय २३
सूरज पहुँचे जब ड्योढ़ी में बोला द्वारपाल शिरनाय ॥
कौने राजाके लड़िकाहौ राजै खबरि देयँ पहुँचाय २४
बातें सुनिकै द्वारपाल की सूरज हाल दीन समुझाय ॥
द्वारपाल सुनि गा राजा ढिग तुरतै खबरि सुनाई जाय २५
सुनिकै बातें दरवानी की राजै हुकुम दीन फरमाय ॥
द्वारपाल सूरज ढिग आयो लैके सभा पहुँचा जाय २६
चिट्ठी दीन्ह्यो तहँ सूरज ने जयचँद पढ़ा बहुत मनलाय ॥
क्यहिका लड़का घरभारू है पथरीगढ़ै बियाहन जाय २७
घोड़ अगिनिया जिनकेघरमाँ ज्यहिके मारे फौज बिलाय ॥
तुरतै टीकाको लौटारयो यहु महराज कनौजीराय २८
चलिभे सूरज तहँ कनउजे ते ठरई फेरि पहुंचे आय ॥
पांचकोस मोहबे के आगे मारै हिरन उदयसिंहराय २६
सूरज ऊदन यकमिल हैगे दूनों कीन्ह्यो रामजुहार ॥
ऊदन पूछैं तहँ सूरज ते ठाकुर पथरी के सरदार ३०
टीको ऐसो का लै गमन्यो नेगी संग तुम्हारे चार ॥
सूरज बोलो तब ऊदन ते ठाकुर बेंदुलके असवार ३१
निकरे हनवन हम गङ्गा के साँचे हाल दीन बतलाय ॥
काह शिकारै तुम आयो है अकसर बनै उदयसिंहराय ३२
सुनिकै बातें ये सूरज की बोला तुरत बनाफरराय ॥
कियो बहाना तुम सूरज है नेगी संग लियेहौ भाय ३३