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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 166

मलखानका विवाह । १६१ ५
हनवन केरी यह सामा ना झूंठी बात रह्यो बतलाय ॥
सूरज बोले फिरि ऊदन ते सांची सुनो बनाफरराय ३४
टीका लाये हम बहिनी का दिल्ली कनउज आये मँझाय ॥
टीका लीन्ह्यो क्यहु क्षत्री ना जावैं लौटि बनाफरराय ३५
इतना सुनिकै ऊदन बोले हमपर शारद भई सहाय ॥
दादा कोर मलखाने हैं टीका लिहे चलो तुम भाय ३६
सुफल तुम्हारी मेहनत होई हमरो काज सिद्ध है जाय ॥
सुनिकै बातें ये ऊदन की सूरज बोला बचन रिसाय ३७
नहीं आज्ञा महराजा की टीका नग्र मोहोबे जाय ॥
जाति बनाफर की हीनी है कीरति रही जगत में छाय ३८
सुनिकै बातें ये सूरज की बोला उदयसिंह सरदार ॥
नीके जैहौ तौ लैजैहौं नहिं यह देखिलेउ तलवार ३६
सुनिकै बातें ये ऊदन की नाई बारी उठे डेराय ॥
ते समुझावैं भल सूरजको मानो कही बिसेनेराय ४०
रारि न करियो तुम ऊदनते नामी देशराज को लाल ॥
पाँच कोस मोहबा है बाकी जहँ पर बसैं रजापरिमाल ४१
सुनि सुनि बातें सबनेगिनकी सूरज मनै गयो तसआय ॥
नेगिन लैके सूरज ऊदन पहुँचे जहाँ चँदेलोराय ४२
सजी कचहरी परिमालिक की भारी लाग राज दरबार ॥
ब्रह्मा आल्हा मलखे देबा सय्यद बनरसका सरदार ४३
देखिकै सूरजको परिमालिक बोले मधुर वचन मुसुकाय ॥
कहाँते आयो औ कहँ जैहौ आपन हाल देउ बतलाय ४४
सुनिकै बातें परिमालिककी सूरज यथातथ्य गे गाय ॥
हाल जानिकै सब चंदेलो बोला सुनो बनाफरराय ४५
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