आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआल्हाका बिवाह । १५१ ३५
धन्य बखानों दुउ रानिनको जिनके पूत सुपूते चार ॥
धन्य बखानों मलखाने को माड़ो भलीकीन तलवार १०३
भुजा उखारयो ज्यहि अभईके आल्हाकेर लहुरवा भाय ॥
तीनों चलिये अब मड़ये को भौंरी तुरत देयँ करवाय १०४
इतना सुनिकै मलखे बोले फौजन डंका देउ बजाय ॥
कह नयपाली सुन मलखाने इकलो दूलह देउ पठाय १०५
कह मलखाने सुन नैपाली तुमसों सत्य देयँ बतलाय ॥
किरिया करलो श्रीगंगाकी ब्याहन तबै तुम्हारे जायँ १०६
यह मनभाई नयपाली के किरिया तुरत कीन सरदार ॥
तीनों लड़का मलखे छोड़े आपौ फाँदिभये असवार १०७
देवा ऊदन मन्नागूजर सय्यद बनरस का सरदार ॥
सजि जगनायक मोहबेवाला रूपन बारी भयो तयार १०८
आल्हा बैठे फिरि पलकी में मनमें श्रीगणेशंपद ध्याय ॥
सबियाँ चलिभे नैनागढ़ को महलन तुरत पहूँचे जाय १०६
खम्भा गड़िगा तहँ चन्दन का मालिन माड़ो कीन तयार ॥
सखियाँ आईं नयपाली घर गावन लगीं मंगलाचार ११०
चढ़ो चढ़उवा जब सुनवाँ का फाटक बन्द लीन करवाय ॥
क्षत्री आये जे लड़ने को ते कोठेपर रखे छिपाय १११
भो गठिबन्धन जब आल्हा को थाल्हा गड़ा शूरमन क्यार ॥
प्रथमै पूज्यो श्रीगणेश को गौरीनन्दन शम्भु कुमार ११२
भाँवरि पहिली के परतैखन पण्डित कीन बेद उच्चार ॥
जोगा मारयो तलवारी को ऊदन लीन ढालपर वार ११३
भाँवरि दूसरिके परतैखन भोगा हनी तुरत तलवार ॥
मलखे ठाढ़े रहैं दहिने पर सो लै लई ढालपर वार ११४